CAG रिपोर्ट में खुलासा! आंगनबाड़ी, हॉस्टल और बाल देखरेख संस्थानों में मिला खामियां, 16% किराये पर चल रहे, अतिरिक्त बोझ बढ़ा

MP News: कामकाजी महिला छात्रावासों की स्थिति भी चिंताजनक मिली. प्रदेश में 59 छात्रावासों में से केवल 13 संचालित पाए गए, जबकि 22 का उपयोग अन्य कार्यों में किया जा रहा था और 4 पूरी तरह बंद थे. कई छात्रावास जर्जर, अधूरे या खंडहर जैसी स्थिति में मिले
CAG report Anganwadis Working Women Hostels and Child Care Centres found irregularities

सांकेतिक तस्वीर

MP News: मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट में वर्ष 2019-20 से 2023-24 की अवधि में आंगनबाड़ी केंद्रों, कामकाजी महिला छात्रावासों और बाल देखरेख संस्थानों की व्यवस्था में व्यापक कमियां सामने आई हैं.

वित्तीय प्रबंधन में बढ़ी अनियमितताएं

रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 97,303 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, लेकिन 54,903 स्वीकृत केंद्रों में से 8,842 (16%) अभी भी किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं. कई केंद्रों में पेयजल, शौचालय, खेल मैदान, स्टोर रूम और बच्चों के अनुकूल आधारभूत सुविधाओं का अभाव मिला. विभाग में जिला परियोजना अधिकारियों, बाल विकास परियोजना अधिकारियों और पर्यवेक्षकों के बड़ी संख्या में पद रिक्त पाए गए. 202 आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण में देरी से 6.18 करोड़ रुपये की अतिरिक्त लागत आई. राज्य सरकार ने गर्म पका भोजन योजना, निर्माण कार्यों और वित्तीय प्रबंधन में भी अनियमितताएं दर्ज कीं.

छात्रावासों की स्थिति चिंताजनक

कामकाजी महिला छात्रावासों की स्थिति भी चिंताजनक मिली. प्रदेश में 59 छात्रावासों में से केवल 13 संचालित पाए गए, जबकि 22 का उपयोग अन्य कार्यों में किया जा रहा था और 4 पूरी तरह बंद थे. कई छात्रावास जर्जर, अधूरे या खंडहर जैसी स्थिति में मिले. डे-केयर सेंटर भी प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हुए.

बाल देखरेख संस्थानों में मिली कमियां

बाल देखरेख संस्थानों (CCI) में भी गंभीर कमियां सामने आईं. कई जिलों में आधारभूत सर्वेक्षण नहीं हुआ, बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था और स्टाफ की कमी पाई गई. कुछ संस्थानों में सीसीटीवी तक चालू नहीं थे, सुरक्षा कर्मियों की कमी और रिकॉर्ड संधारण में भी अनियमितताएं मिलीं. रिपोर्ट में राज्य सरकार को निगरानी मजबूत करने, रिक्त पद भरने, आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है.

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आंगनबाड़ी से जुड़े तथ्य

97,303 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित.
8,842 केंद्र (16%) अब भी किराए के भवनों में चल रहे हैं.
पेयजल, शौचालय, खेल मैदान समेत आधारभूत सुविधाओं का अभाव.
अधिकारियों और पर्यवेक्षकों के कई पद रिक्त हैं.
202 भवनों के निर्माण में देरी से 6.18 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च.
प्रशिक्षण, निगरानी और वित्तीय प्रबंधन में कमियां.

कामकाजी महिला छात्रावास

59 छात्रावासों में केवल 13 संचालित हैं.
22 छात्रावासों का अन्य कार्यों में उपयोग हो रहा है.
4 छात्रावास बंद है.
कई भवन अधूरे, जर्जर और अनुपयोगी हैं.
डे-केयर सेंटर प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रहे हैं.

बाल देखरेख संस्थान (CCI)

कई जिलों में आधारभूत सर्वेक्षण नहीं.
बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था में कमी.
सीसीटीवी, स्टाफ और निगरानी व्यवस्था कमजोर.
रिकॉर्ड संधारण और निरीक्षण में अनियमितताएं.
CAG ने व्यापक सुधार और नियमित निगरानी की सिफारिश की.