महादेव सट्टेबाजी ऐप का प्रमोटर सौरभ चंद्राकर गिरफ्तार, अजंता मेंडिस के नाम पर बनवाया था फर्जी पासपोर्ट
रायपुर. महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है. उसके पास से इंडोनेशिया में जारी एक फर्जी पासपोर्ट मिला है, जो अजंता मेंडिस के नाम पर बनाया गया था. जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ इसी फर्जी पहचान के सहारे विदेश में रहकर अपनी असली पहचान छिपा रहा था. इसी पासपोर्ट के आधार पर जुलाई में ओमान में उसे हिरासत में लिया गया था. अब भारतीय जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर महादेव सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े कई अहम राज खोलने की तैयारी में हैं.
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की विशेष टीम रविवार शाम उसे ओमान से भारत लेकर पहुंची. सोमवार को उसे दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय से रायपुर की अदालत में पेश करने के लिए ले जाया गया. सौरभ चंद्राकर के खिलाफ सीबीआई के दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं. इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज है. (Sourabh Chandrakar Mahadev App Arrest)
6000 करोड़ रुपए के घोटाले में शामिल होने का आरोप
सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी सिंडिकेट का प्रमोटर बताया जाता है. उस पर करीब 6000 करोड़ रुपए के अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले में शामिल होने का आरोप है. जांच में सामने आया था कि महादेव ऑनलाइन बुक देश के बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक था, जिसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था. इस नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेलों सहित विभिन्न आयोजनों पर ऑनलाइन दांव लगाए जाते थे. इसके लिए देशभर में पैनल और फ्रेंचाइजी का नेटवर्क तैयार किया गया था.
म्यूल खातों से घुमाई जाती थी सट्टेबाजी की रकम
जांच एजेंसियों के अनुसार, सट्टेबाजी से होने वाली कमाई को दूसरे लोगों के नाम पर खोले गए बैंक खातों यानी म्यूल खातों के माध्यम से इधर-उधर किया जाता था. कई स्तरों पर लेन-देन के जरिए रकम की वास्तविक पहचान छिपाई जाती थी. इसके बाद हवाला नेटवर्क के माध्यम से पैसा विदेश भेजा जाता था. जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि सिंडिकेट के संचालन में बाधा नहीं आए, इसके लिए सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर प्रोटेक्शन मनी दी जाती थी. सौरभ की भारत वापसी से इस रकम के लेन-देन और कथित संरक्षण देने वालों के संबंध में जानकारी मिलने की उम्मीद है.
रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान में हुई गिरफ्तारी
जांच एजेंसियां वर्ष 2023 से सौरभ चंद्राकर की तलाश कर रही थीं. उसके ओमान में होने की जानकारी मिलने के बाद भारतीय एजेंसियों ने वहां के अधिकारियों से संपर्क किया. इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था. इसके बाद सीबीआई और ईडी ने उसके प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजे और उसके खिलाफ जुटाए गए साक्ष्य भी साझा किए. ओमान सरकार और वहां की पुलिस के सहयोग से प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी की गई. (Sourabh Chandrakar Mahadev App Arrest)
CBI और ईडी कर रही हैं जांच
छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े मामलों की जांच अपने हाथ में ली थी. एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराओं तथा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किए हैं. वहीं, ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच कर रही है. एजेंसी भारत और विदेश में कई संपत्तियों को कुर्क कर चुकी है.
सौरभ की वापसी से खुल सकते हैं कई राज
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सौरभ चंद्राकर को भारत लाए जाने पर कहा है कि इससे जांच एजेंसियों को कथित अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट के संचालन, आर्थिक लेन-देन और प्रोटेक्शन मनी से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी. अब जांच एजेंसियों की नजर सौरभ से होने वाली पूछताछ पर है. इससे नेटवर्क के अन्य संचालकों, आर्थिक लेन-देन और विदेशों में छिपाई गई संपत्तियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की संभावना है. (Sourabh Chandrakar Mahadev App Arrest)
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