पश्‍च‍िम बंगाल में चुनाव से पहले कांग्रेस में कार्यकर्ताओं का संकट, कैसे जनता तक पहुंचेंगे चुनावी वादे?

Bengal elections 2026: बंगाल के चुनाव में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के संकट से जूझ रही है. यहां पार्टी के पास उम्मीदवार तो हैं. लेकिन जनता तक अपनी बात पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं की कमी है.
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राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे

Bengal elections 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का प्रचार हर रोज तेज होता होता जा रहा है. तमाम राजनीतिक दल अपनी-अपनी तैयारियों में लगे हुए हैं. दुसरी तरफ जो लंबे समय बाद अकेले बंगाल में चुनाव लड़ रही है. एक बड़ी समस्या से जूझ रही है. कांग्रेस के पास लगभग सीटों पर उम्मीदवार तो हैं. लेकिन, प्रचार के लिए कार्यकर्ता ही नहीं है. यही वजह है कि कांग्रेस को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

पश्‍च‍िम बंगाल में कांग्रेस साल 1972 के बाद खुद को मजबूत नहीं कर पाई है. उसके बाद लगभग हर चुनाव में कांग्रेस की स्‍थ‍ित‍ि कमजोर ही होती गई है. आखिरी बार साल 1972 में कांग्रेस ने 200 सीटों पर जीत दर्ज की थी. वहीं इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था. उसके बाद से आज तक कांग्रेस अपने आप को मजबूत नहीं कर पाई है.

अपने दम पर चुनाव लड़ रही कांग्रेस

कांग्रेस इस चुनाव को अकेले ही लड़ रही है. कई दिग्गज चेहरे चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. पिछले चुनाव में कांग्रेस को महज तीन फीसदी वोट ही मिला था. यही वजह है कि उसका खाता तक नहीं खुल पाया था. इस बार पार्टी का फोकस अपने गढ़ जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तरी दिनाजपुर पर है. कांग्रेस को इस बार यह उम्‍मीद भी है कि सभी सीटों पर चुनाव लड़ने से उसका वोट प्रतिशत बढ़ेगा.

कांग्रेस में कार्यकर्ताओं का संकट

कांग्रेस पूरी तैयारी के साथ बंगाल के चुनावी रण में उतर चुकी है. कई नेताओं का मानना है कि यह चुनाव आसान नहीं रहने वाला है. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी कहा था कि संगठन यहां कमजोर है. यही वजह है कि यह चुनाव काफी कठिन है. तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस जो चुनावी वादे कर रही है. उन वादों को जनता तक पहुंचाने के लिए उसके पास कार्यकर्ता भी नहीं हैं. यही वजह है कि चुनाव से पहले ही कांग्रेस को पसीने आ रहे हैं.

बंगाल में कमजोर हो रही कांग्रेस

कांग्रेस बंगाल में लगभग हर चुनाव में कमजोर होती आ रही है. साल 2011 के चुनावों में 42 सीटों पर जीत दर्ज कराई थी. तो वहीं  2016 के चुनाव में 44 सीटों पर अपनी जीत दर्ज की थी. लेकिन हालात इतने खराब हुए कि साल 2021 के चुनावों में पार्टी खाता भी नहीं खोल पाई. हालांकि इस बार हो रहे चुनाव में पार्टी को काफी उम्मीदें नजर आ रही हैं. 

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