बिहार विधान परिषद में 100 कर्मचारियों की एंट्री पर रोक,नियुक्ति प्रक्रिया पर ही उठे सवाल
बिहार विधान परिषद
Bihar News: बिहार की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद अब विधान परिषद में हुई नियुक्तियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में बहाल किए गए करीब 100 कर्मचारियों को शुक्रवार को विधान परिषद परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया. अचानक लगाए गए इस प्रतिबंध से नाराज कर्मचारियों ने गेट पर विरोध प्रदर्शन किया.
जानकारी के मुताबिक, जिन कर्मचारियों को प्रवेश से रोका गया है, उनमें निजी सहायक, सुरक्षा प्रहरी और डाटा एंट्री ऑपरेटर के पदों पर नियुक्त लोग शामिल हैं. इनमें सात निजी सहायक, करीब 56 सुरक्षा प्रहरी और 33 डाटा एंट्री ऑपरेटर बताए जा रहे हैं. इन सभी की नियुक्तियां पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में हुई थीं.
शुक्रवार को जब कर्मचारी ड्यूटी पर पहुंचने के लिए विधान परिषद के गेट पर पहुंचे तो सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया. इसके बाद कर्मचारियों ने वहीं विरोध शुरू कर दिया. स्थिति को देखते हुए परिसर के बाहर पुलिस बल की तैनाती भी बढ़ा दी गई. प्रवेश नहीं मिलने पर कई कर्मचारी परिसर में बने पार्क में बैठ गए.
नियुक्ति को लेकर क्या हैं आरोप?
आरोप है कि इन कर्मचारियों के पास पद के लिए जरूरी शॉर्टहैंड का पर्याप्त ज्ञान नहीं है. जबकि भर्ती के लिए यह अनिवार्य योग्यता थी. इसी को लेकर 4 नवंबर को उनकी दक्षता जांच परीक्षा रखी गई थी. परीक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए, लेकिन सातों अभ्यर्थियों में से कोई भी शामिल नहीं हुआ.
अब इन अभ्यर्थियों को दूसरा मौका दिया गया है. उन्हें 18 नवंबर को दोबारा परीक्षा में शामिल होना होगा. इस बार भी अनुपस्थित रहने पर उनकी उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है.
कर्मचारियों ने क्या कहा?
एंट्री से रोके गए कुछ कर्मचारियों का कहना है कि उनका मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है. 3 नवंबर को सुनवाई भी हुई थी और अधिकारियों को कोर्ट के आदेश की जानकारी दी गई थी. इसके बावजूद उन्हें अचानक रोक दिया गया.
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