‘9 आतंकी ठिकाने- 11 एयर फील्ड तबाह…’, ऑपरेशन सिंदूर का साल पूरा, तीनों सेना प्रमुख बोले- हमने पाकिस्तान के 13 विमान गिराए

Operation Sindoor 1st Anniversary: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरा होने पर सेना के अध‍िकार‍ियों ने एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उन्‍होंने बताया कि एक साल पहले ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को कितना नुकसान पहुंचाया था.
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर पीसी

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर पीसी

Operation Sindoor Anniversary: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए आज के दिन एक साल पहले ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत हुई थी. इस ऑपरेशन में तीनों सेनाओं ने मिलकर पाकिस्तान मौजूद आतंकी ठिकानों और आतंकवादियों को तबाह किया था. इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे. ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर जयपुर में तीनों सेनाओं के प्रमुख ने मीडिया को संबोधित किया.

बातचीत के दौरान सेना के अधिकारियों ने साफ कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, अभी तो शुरुआत है. 65% हथियार अब अपने देश में बन रहे हैं. सेना उन्हीं हथियारों का उपयोग कर रही है। भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ता रहेगा. एयर मार्शल बोले- जियो और जीने दो के सिद्धांत पर हम जीते हैं. हमारे शांत रहने को कमजोरी न समझा जाए.

एयर मार्शल अवधेश कुमार बताया कि न तो हमारा कोई मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर, न ही सिविलियन इन्फ्रास्ट्रक्चर का नुकसान हुआ. हमनें सभी हमलों को न्यूट्रलाइज कर दिया था. हालांकि जीत हार्ड फैक्ट्स के साथ मिलती है.तथ्य ये है कि हमने उनके 9 आतंकी ठिकाने नेस्तनाबूद किए.11 एयर फील्ड तबाह किए और 13 विमान गिराए.

तीनों सेनाओं ने मिलकर किया था हमला

ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर भी तीनों सेनाओं का एक संयुक्त प्रयास था. उसने जमीन, हवा और समुद्री क्षमताओं को साझा स्थितिगत जागरूकता, एक समान ऑपरेशन और खुफिया जानकारी, और वास्तविक समय में निर्णय लेने की क्षमता के साथ एकीकृत किया.

उन्‍होंने बताया कि कुल नौ स्टैंड ऑफ प्रिसिजन स्ट्राइक की गईं. जिनमें से सात भारतीय सेना द्वारा और दो भारतीय वायु सेना द्वारा की गईं.  इन सभी को एकदम सही समय पर अंजाम दिया गया. इनसे पूरी तरह से चौंकाने वाला प्रभाव पड़ा और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू और कश्मीर के अंदरूनी हिस्सों, साथ ही पाकिस्तान के मुख्य भूभाग में स्थित हर स्थापित ठिकाने को अधिकतम नुकसान पहुंचाया गया. यह इस बात का संकेत था कि अब कोई भी पनाहगाह सुरक्षित नहीं है.”

सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं- राजीव घई

राजीव घई ने कहा कि सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं है. मेरी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कोई अंत नहीं था. यह तो बस एक शुरुआत थी. आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई जारी रहेगी. एक साल बाद, हम न सिर्फ़ उस ऑपरेशन को याद करते हैं, बल्कि उसके पीछे के सिद्धांत को भी याद करते हैं.

उन्‍होंने आगे कहा कि भारत अपनी संप्रभुता, अपनी सुरक्षा और अपने लोगों की रक्षा पूरी दृढ़ता, पेशेवर तरीके से और पूरी जिम्मेदारी के साथ करेगा”

हमारी चुप्पी को हमारी अनुपस्थिति समझा जाता  है- अवधेश कुमार

एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने कहा, “आज पहलगाम के उस भयानक नरसंहार को 1 साल और 15 दिन बीत चुके हैं, ठीक एक साल पहले ही हमारे पहले हथियारों ने अपने लक्ष्य को भेदा था. पहलगाम की घटना अपने आप में एक ऐसी घटना है, जिसकी जितनी भी निंदा की जाए या जिसे जितना भी नकारा जाए, वह कभी भी काफी नहीं होगा.

उन्‍होंने कहा कि हम अपने उन देशवासियों को वापस नहीं ला सकते, जिनका 22 अप्रैल 2025 को बड़ी बेरहमी से नरसंहार किया गया था. लेकिन हम निश्चित रूप से यह संकल्प ले सकते हैं कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. ‘ऑपरेशन सिंदूर’, जो अभी रुका हुआ है, इसी संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक प्रयास है.

उन्‍होंने कहा कि अनादि काल से, हम ‘जियो और जीने दो’ के सरल दर्शन के साथ जीते आए हैं. लेकिन जब शांति की हमारी इच्छा को हमारी कमजोरी मान लिया जाता है, और हमारी चुप्पी को हमारी अनुपस्थिति समझा जाता है, तो फिर कार्रवाई करने के अलावा हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचता है.  जब हम कार्रवाई करते हैं, तो वह अधूरी नहीं होती. वह निर्णायक होती है, वह घातक होती है, और वही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का रूप ले लेती है.”

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