क्या है लिली थॉमस Vs भारत सरकार फैसला? जिसके कारण कई नेताओं की गई विधायकी और सांसदी
वकील लिली थॉमस
What is lily thomas sc verdict: देशभर के अलग-अलग राज्यों में मौजूदा विधायकों और सांसदों पर कई गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं. कई मामलों में उनको सजा हो चुकी है तो कई मामले आज भी कोर्ट में चल रहे हैं, जिन पर सभी को फैसले का इंतजार है. मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट से विधायक राजेंद्र भारती से जुड़े ऐसे ही एक मामले में गुरुवार 2 अप्रैल को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है.
कोर्ट ने विधायक और उनके सह आरोपी को 3 साल की सुनाई है. हालांकि, कोर्ट ने भारती को 50 हजार रुपये के बॉन्ड पर तत्काल जमानत दे दी है और हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन का समय दिया है. कोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर लिली थॉमस Vs भारत सरकार फैसला चर्चा में आ गया है, जिसकी वजह से देश के कई विधायकों और सांसदों को अपने पद से हाथ धोना पड़ा है.
इन धाराओं में पाए गए विधायक भारती दोषी
कोर्ट ने फैसला सुनाने से पहले माना की दतिया विधायक राजेंद्र भारती ने आपराधिक साजिश रची थी. इसके साथ ही पद पर रहते हुए बैंक रिकॉर्ड के साथ धोखाधड़ी की थी. उन्हें आईपीसी की धारा
120 यानी आपराधिक साजिश, IPC 420, धोखाधड़ी, IPC 467/468/471: दस्तावेजों की जालसाजी की धाराओं में दोषी पाया गया है. इन्हीं धाराओं के आधार कोर्ट ने फैसला सुनाया है.
विधानसभा की सदस्यता रद्द
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार यदि किसी विधायक या फिर सांसद को 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता को तत्काल प्रभाव से रद्द माना जाएगा. राजेंद्र भारती को कोर्ट ने 3 साल की सजा सुनाई है. इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी है. इसके साथ ही सीट को रिक्त घोषित कर दिया है. अगर आने वाले 30 दिनों के भीतर भारती को सुनाई गई सजा पर हाई कोर्ट स्टे नहीं लगाता है तो दतिया में उपचुनाव कराए जाएंगे.
क्या है लिली थॉमस केस और सुप्रीम कोर्ट का फैसला?
सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल पहले अपने ही फैसले में जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8(4) को निरस्त कर दिया था. कोर्ट के इस फैसले से पहले जनप्रतिनिधियों की सदस्यता तुरंत खत्म नहीं होती थी. कोर्ट सजा सुनाए जाने के बाद उसे चुनौती देने के लिए 3 महीने का समय देता था. ऊपरी अदालत में जब तक उसकी अपील लंबित होती थी, तब तक उसकी सदस्यता नहीं जा सकती थी. इसके साथ ही अपील पर अंतिम फैसला आने तक उसकी सदस्यता खत्म नहीं हो सकती थी.
साल 2013 के अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 (4) को असंवैधानिक ठहराया था. फैसला सुनाते हुए कहा था कि कम से कम 2 साल की सजा होने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता तत्काल प्रभाव से खत्म हो जाएगी. इसके साथ ही सजा खत्म होने के डेट से अगले 6 साल तक वह चुनाव लड़ने के लिए भी अयोग्य होगा. कोर्ट के इस फैसले के बाद ही सांसद राशिद मसूद, आजम खान की सदस्यता चली गई थी.
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सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला वकील लिली थॉमस की याचिका पर सुनाया था. इस केस को लिली थॉमस केस के नाम से जाना जाता है. 10 जुलाई 2013 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया था. जेल में रहते हुए किसी सजायाफ्ता नेता को वोट देने का अधिकार भी नहीं होगा. उस समय की तत्कालीन यूपीए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पलटने की कोशिश की थी. संसद में राहुल गांधी ने इस अध्यादेश को भी फाड़ दिया था. हालांकि इन सब के बाद भी अध्यादेश नहीं पलट सका था.