ये है बादशाह अकबर के जमाने की सबसे महंगी मिठाई, दिवाली पर खूब बिकती है, 500 साल पुरानी है रेसिपी

दिवाली का त्योहार नजदीक है, ऐसे में बाजारों में मिठाईयों की दुकानें सजने लगी हैं. लेकिन क्या आप अकबर की सबसे पसंदीदा मिठाई के बारे में जानते है.
Sohan Halua

फाइल फोटो

दिवाली का त्योहार नजदीक है, ऐसे में बाजारों में मिठाईयों की दुकानें सजने लगी हैं. दिवाली के दिन रसगुल्ला, रस मलाई, लड्डू, इमरती और भी कई तरह की मिठाई जमकर बिकती हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी मिठाई के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे अकबर के समय से जोड़ा जाता है. माना जाता है कि ये मिठाई उस समय खूब पंसद की जाती है. हालांकि आज भी इसके खाने वालों की कोई कमी नहीं है. आइए जातने है इसका नाम और इसे बनाने की रेसिपी.

सोहन हलवा

इस मिठाई का नाम सोहन हलवा है. त्योहारी सीजन में मिठाई के दुकानों पर सोहन हलवा जमकर बिकता है. ऐसा कहा जाता है कि जब बादशाह अकबर अपने बड़े लश्कर (सैनिकों) के साथ किसी लंबी यात्रा या सैन्य अभियान पर निकलते थे, तो उन्हें ऐसे भोजन की आवश्यकता होती थी जो महीनों तक खराब न हो. तब उनके लिए सोहन हलवा बनाया जाता था.

शुद्ध देसी घी और अंकुरित गेंहू का इस्तेमाल

इसे बनाने में शुद्ध देसी घी, अंकुरित गेहूँ (समनक/अंगूरी आटा) और चीनी को घंटों तक घोंटकर तैयार किया जाता है. इसलिए ये एक दो महीने तक खराब नहीं होती और यही इस मिठाई की सबसे बड़ी खासियत हैं.

अकबर को थी बहुत पंसद

कहा जाता है कि जब अकबर किसी लंबी यात्रा पर जाता था तो अपने और लश्कर के लिए दो-तीन महीने तक खराब नहीं होने वाली खाद्य सामग्री रखता था. इसमें सोहन हलवा भी शामिल होता था. आज अजमेर आने वाले जायरीन ख्वाजा की दरगाह पर जियारत के बाद तबर्रुक (आशीर्वाद) के तौर पर इस सोहन हलवे को ले जाना नहीं भूलते.

ये रही सोहन हलवा की रेसिपी

सोहन हलवा एक ट्रेडीशनल रेसिपी है, जो मैदा, दूध और मेवा को मिला कर तैयार किया जाता है. इसे बनाने में समय कुछ ज्‍यादा लग सकता है, मगर यह खाने में बहुत टेस्‍टी होता है करीब 7 से 8 दिन बाद अंकुरित गेहूं को धूप में सुखाया जाता है. इसके बाद इसे पीसकर आटा बना लेते हैं. इस आटे में मैदा, घी और शक्कर मिलाकर उसे प्रोसेस करते हैं. इसे डेकोरेट और स्वाद के लिए हलवाई अब इसमें ड्राइफ्रूट्स का उपयोग भी करने लगे हैं.

ये भी पढ़ें-दिवाली की रात जुआ खेलने की परंपरा क्यों है खास? जानिए शिव-पार्वती से जुड़ी पौराणिक कथा का महत्व

ज़रूर पढ़ें