मुरैना में अतिक्रमण की भेंट चढ़ीं योजनाएं; साढ़े 5 करोड़ की राशि स्वीकृत, लेकिन भवन निर्माण के लिए जमीन खाली नहीं करवा पाए
मुरैना में भू-माफियाओं के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
Input- मनोज शर्मा
MP News: मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के पहाड़गढ़ मुख्यालय में शासकीय जमीनों पर लगातार अतिक्रमण होने से शासन की करोड़ों रुपये की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं. हालात यह है कि सरकारी जमीनों पर कब्जा कर उन्हें मोटी रकम में बेचे जाने के आरोप लग रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी मौन बने हुए हैं.
पहाड़गढ़ में जनपद पंचायत के नवीन भवन के निर्माण के लिए करीब 5 करोड़ 56 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन आज तक भवन निर्माण के लिए जमीन खाली नहीं कराई जा सकी. बताया जा रहा है कि चिन्हित शासकीय भूमि पर निजी लोगों ने कब्जा कर रखा है, जिसके चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा.
ना जमीन का चयन और ना अतिक्रमण हटा सके
इसी तरह बस स्टैंड पर सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए भी राशि स्वीकृत होने के बावजूद जमीन का चयन और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं हो सकी है. पंचायत के खाते में राशि पहुंचने के बाद भी काम अधर में लटका हुआ है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहाड़गढ़ में भू-माफियाओं का इतना दबदबा है कि अधिकारी कार्रवाई करने से बच रहे हैं.
आईटीआई कॉलेज भवन निर्माण में भी अतिक्रमण बड़ी बाधा बना. बताया जा रहा है कि सड़क किनारे हुए कब्जों के कारण भवन को सीमांकन के अनुसार नहीं बनाया जा सका, जिससे करोड़ों की बिल्डिंग की पूरी शोभा प्रभावित हो गई.
दोनों ओर अतिक्रमण के चलते यातायात व्यवस्था बदहाल
पहाड़गढ़ की मुख्य सड़क पर दोनों ओर अतिक्रमण के चलते यातायात व्यवस्था भी बदहाल हो चुकी है. क्षेत्र में तीन अंधे मोड़ होने के कारण कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. 14 अप्रैल 2026 की रात ट्रक पलटने से बिजली के खंभे और कई गुमटियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की नींद नहीं खुल रही.
स्थानीय लोगों का कहना है कि जनपद कॉलोनी, शासकीय क्वार्टर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सहकारी संस्था गोदाम सहित कई सरकारी परिसरों की जमीन पर कब्जे हो चुके हैं. कई बार आवेदन और शिकायतें देने के बाद भी कार्रवाई केवल नोटिसों तक सीमित रह जाती है.
‘कई बार शिकायतें करने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं’
सहकारी गोदाम के सचिव द्वारा एसडीएम, तहसीलदार और कलेक्टर जनसुनवाई में कई बार शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन आज तक अतिक्रमण हटाने की ठोस कार्रवाई नहीं हुई. लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक ढिलाई के कारण सरकारी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं और करोड़ों रुपये की परियोजनाएं अधर में लटकी हुई हैं.
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर शासन और प्रशासन अतिक्रमण हटाने में असमर्थ क्यों दिखाई दे रहा है. अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता.
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