माननीयों की सेवा छोड़िए, पहले बच्चों को पढ़ाइए! 213 शिक्षकों का अटैचमेंट खत्म; शिक्षा विभाग का स्कूलों में वापस भेजने का आदेश
सांकेतिक तस्वीर.
MP News: मध्य प्रदेश में अब विधायक, मंत्री और अफसरों की सेवा में लगे सरकारी शिक्षक वापस स्कूल लौटेंगे. स्कूल शिक्षा विभाग ने 16 जिलों के 213 शिक्षकों का अटैचमेंट खत्म कर उन्हें तत्काल मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में भेजने के आदेश जारी किए हैं. ये शिक्षक वर्षों से मंत्रालय, कलेक्टर कार्यालय, विधायक कार्यालय और दूसरे प्रशासनिक दफ्तरों में तैनात थे. अब सवाल यह है कि क्या इस फैसले से सरकारी स्कूलों की पढ़ाई में सुधार होगा?
10 सालों से टीचर कर रहे माननीयों की सेवा!
विभाग की सूची में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां शिक्षक वर्षों से स्कूलों की बजाय मंत्रालय और प्रशासनिक कार्यालयों में सेवाएं दे रहे थे. भोपाल के सहायक शिक्षक मनीष शर्मा वर्ष 2015 से मंत्रालय में अटैच थे, जबकि सुनील धानोरकर 2008 से मंत्रालय में पदस्थ थे. जबलपुर के सहायक शिक्षक सुभाग सिंह पटेल विधायक के निज सचिव के रूप में कार्यरत थे, वहीं कई शिक्षक कलेक्टर और अन्य सरकारी कार्यालयों में अटैच थे.
शिक्षा विभाग के आदेश के बाद सियासत शुरू
इस फैसले को लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है. कांग्रेस का कहना है कि वर्षों तक स्कूलों से दूर रहे शिक्षकों को अब दोबारा पढ़ाई के माहौल में ढलने में समय लगेगा. वहीं बीजेपी का कहना है कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है और शिक्षकों का स्थान स्कूल ही है.
स्कूलों में शिक्षकों की कमी लंबे समय से चिंता का विषय रही है. ऐसे में बड़ी संख्या में शिक्षकों का प्रशासनिक दफ्तरों में अटैच रहना लगातार सवालों के घेरे में था. अब विभाग ने उन्हें वापस स्कूल भेजने का फैसला लिया है. इससे शिक्षा व्यवस्था को कितना लाभ मिलेगा और बच्चों की पढ़ाई में कितना सुधार होगा, इस पर सबकी नजर रहेगी.
स्कूलों की शिक्षा पर होगा सकारात्मक असर
सरकारी शिक्षक का पहला और सबसे बड़ा दायित्व बच्चों को शिक्षा देना है, लेकिन वर्षों से कई शिक्षक मंत्रालय, विधायक कार्यालय और प्रशासनिक दफ्तरों में बाबू या निजी सहायक की भूमिका निभा रहे थे. इससे एक ओर स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी रही, तो दूसरी ओर आम लोगों और जरूरतमंद शिक्षकों को भी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े. अब सरकार ने ऐसे शिक्षकों को वापस स्कूल भेजने का फैसला लिया है. इसे शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. अब देखना होगा कि शिक्षकों की घर वापसी का यह फैसला सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर कितना सकारात्मक असर डालता है.
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