‘लाडली बहना’ बंद कराने MP हाई कोर्ट पहुंची पूर्व पार्षद, मंत्री विश्वास सारंग बोले- कांग्रेस महिला विरोधी, योजना जारी रहेगी
मंत्री विश्वास सारंग
MP Ladli Behna Yojana Petition: मध्य प्रदेश की महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने लाडली बहना योजना चलाई है. इस योजना के अंतर्गत प्रदेश में करीब 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को 1500 रुपये हर महीने मिल रहे हैं. इस योजना पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है.
मंत्री बोले- महिला विरोधी कांग्रेस पार्टी
लाडली बहना योजना को बंद करने वाली याचिका पर मंत्री विश्वास सारंग ने बड़ा बयान दिया है. मंत्री सारंग ने कहा कि थाटीपुर निवासी कांग्रेस की पूर्व पार्षद सुधा दुबे ने योजना को बंद करने की याचिका कोर्ट में दायर की है. उन्हाेंने कहा कि योजना को लेकर सरकार कटिबद्ध है. मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से महिला विरोधी रही है. योजना को बंद करने के लिए कांग्रेस की नेत्री ने याचिका लगाई है, लेकिन योजना आगे भी जारी रहेगी.
कांग्रेस की पूर्व पार्षद ने दायर की याचिका
दरअसल, ग्वालियर के थाटीपुर स्थित नेहरू कॉलोनी की रहने वाली वार्ड-22 से कांग्रेस की पूर्व पार्षद सुधा दुबे ने अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा के माध्यम से ऐ जनहित याचिका दायर की थी. इस याचिका में मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग और वित्त विभाग के प्रमुख सचिवों को पक्षकार बनाया था. याचिका में लाडली बहना योजना को असंवैधानिक बताते हुए इसको तत्काल प्रभाव से निरस्त करने और महिलाओं को नकद राशि देने पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई थी.
कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी करके 4 हफ्ते में सरकार की तरफ से जवाब मांगा है.
पैसे की बदले रोजगार दे सरकार – पूर्व पार्षद
योजना को लेकर पूर्व पार्षद का कहना है कि महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने से अच्छा है उन्हें रोजगार और उनके बच्चों को नौकरी के अवसर दिए जाए, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सके. उन्हाेंने कहा कि वे महिलाओं के कल्याण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिना कौशल विकास, वोकेशनल ट्रेनिंग या स्वारोजगार के सीधे महिलाओं को पैसा देने स्थायी समाधान नहीं है.
इसके पीछे उनका तर्क है कि महिलाओं को ऐसे राशि मिलेगी तो उनकी सरकारी सहायता पर निर्भरता बढ़ सकती है और उनके भीतर छिपी प्रतिभा का पूरा उपयोग नहीं हो पाएगा. सुधा दुबे ने आरोप लगाते हुए कहा कि योजना के माध्यम से राशि बांटना वोट की राजनीति का हिस्सा है.
योजना पर 22,500 करोड़ से ज्यादा हर साल खर्च
कोर्ट में दायर याचिका में बताया गया है कि वर्तमान में सरकार 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की सहायता राशि दे रही है. इसके तहत राज्य सरकार पर हर महीने करीब 1878 करोड़ और सालाना 22,500 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय भार पड़ रहा है.
वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने बजट में लाडली बहना योजना के लिए 23,882 करोड़ का प्रावधान किया गया है. याचिकाकर्ता ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य सरकार कर्ज लेकर योजना को चला रही है, तो इससे महिलाओं के कौशल और रोजगार समेत आत्मनिर्भरता की स्थिति में कितना प्रतिशत का बदलाव आया है.
प्रदेश सरकार ने रखा अपना पक्ष
कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार की तरफ से आपत्ति जताई कि योजना का लाभ लेने वाली सवा करोड़ महिलाओं को याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया है. इस आपत्ति पर हाई कोर्ट ने निर्देश दिए कि लाभार्थियों की संख्या सवा करोड़ से भी ज्यादा है, इसलिए लाभार्थियों की सूची शासन खुद कोर्ट में पेश करे. इसके साथ ही शासन के माध्यम से ही याचिका की कॉपी लाभाथियों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए गए.