MP विधानसभा के 5 दिन के सत्र पर नेता प्रतिपक्ष का हमला, बोले- 7 करोड़ जनता के सवालों के लिए समय नहीं
एमपी विधानसभा (फोटो- सोशल मीडिया)
MP Vidhan Sabha Session: मध्यप्रदेश विधानसभा के आगामी पांच दिवसीय सत्र को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने सत्र की अवधि को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि पांच दिन में प्रदेश की लगभग सात करोड़ जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और उनके सवालों के जवाब देना संभव नहीं है. सरकार के पास अनुपूरक बजट लाने और उसे विधानसभा से पारित कराने के लिए समय है, लेकिन किसानों, महिलाओं, युवाओं, कर्मचारियों और आम जनता की समस्याओं पर चर्चा के लिए समय नहीं है. उन्होंने मांग की कि विधानसभा सत्र की अवधि बढ़ाई जाए, ताकि प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सके.
नेता प्रतिपक्ष ने क्या कहा ?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में से एक है. जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर विधानसभा में भेजती है, ताकि वे अपने क्षेत्र और प्रदेश की समस्याओं को सदन में उठा सकें. लेकिन पांच दिन के सत्र में हजारों सवालों और प्रदेश में हुई घटनाओं पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतंत्र बचाने की बात तो करती है, लेकिन लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण मंच पर जनता के सवालों का सामना करने से बच रही है.
उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को खाद की उपलब्धता से लेकर महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं के रोजगार और कर्मचारियों की समस्याओं तक कई गंभीर मुद्दे हैं. बालाघाट, देवास और सागर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों जैसी घटनाओं पर सरकार को सदन में जवाब देना चाहिए. युवाओं को रोजगार, उद्योगपतियों और लघु उद्योगों की समस्याओं, कर्मचारी और शिक्षक वर्ग के आंदोलनों पर भी चर्चा जरूरी है. वाल्मीकि समाज के सफाई कर्मचारियों ने भी अपनी मांगों को लेकर धरना दिया है. ऐसे अनेक विषय हैं, जिन पर जनप्रतिनिधि विधानसभा में सरकार से जवाब मांगना चाहते हैं.
पांच दिन का ही सत्र क्यों आयोजित कर रही है-नेता प्रतिपक्ष
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल किया कि जब प्रदेश में इतने महत्वपूर्ण मुद्दे मौजूद हैं, तो सरकार पांच दिन का ही सत्र क्यों आयोजित कर रही है? क्या सरकार इन सवालों से डर रही है? उन्होंने कहा कि विधानसभा में चर्चा का उद्देश्य केवल विधेयक और बजट पारित कराना नहीं है, बल्कि सरकार की जवाबदेही तय करना और जनता की समस्याओं को सामने लाना भी है.
उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण कराने की मांग भी उठाई. उनका कहना था कि कई छोटे राज्यों में विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाता है, ताकि आम जनता सदन में होने वाली चर्चा और सरकार के जवाबों को देख सके. मध्यप्रदेश में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा? क्या सरकार नहीं चाहती कि प्रदेश की जनता अपने प्रतिनिधियों को सवाल पूछते और मंत्रियों को जवाब देते हुए देखे?
जनता की समस्याओं को समझना होगा-नेता प्रतिपक्ष
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार के मुखिया और मंत्री सदन में सवालों के जवाब दे सकते हैं, लेकिन जनता की समस्याओं और उसके दुख को भी समझना होगा. मुख्यमंत्री मुस्कुराकर जवाब दे सकते हैं, लेकिन जनता के आंसुओं और परेशानियों से जुड़े सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने सरकार से सत्र की अवधि बढ़ाने और विधानसभा की कार्यवाही के सीधे प्रसारण पर निर्णय लेने की मांग की.



