Sickle Cell MP: क्या है सिकल सेल? एमपी में तेजी से बढ़ रहे मरीज, मिले 40,741 केस

Sickle Cell MP: एमपी में सिकल सेल के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं. 1.33 करोड़ लोगों की जांच में 40,741 मरीज और 2.45 लाख कैरियर मिले. सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों में फ्री इलाज शुरू किया.
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Sickle Cell MP: भोपाल: राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन NSCAEM के तहत मध्य प्रदेश में अब तक 1,33,69,993 यानी 1.33 करोड़ लोगों की जांच की जा चुकी है. यह संख्या देश में दूसरी सबसे बड़ी है. लेकिन जांच के साथ ही जो आंकड़े सामने आए हैं वो चिंताजनक हैं.

MP में 40 हजार से ज्यादा लोग पीड़ित

राज्यसभा में स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा के अनुसार MP में 40,741 लोग सिकल सेल बीमारी से पीड़ित पाए गए हैं. इसके अलावा 2,45,024 लोग ‘वाहक’ यानी कैरियर निकले हैं. इसका मतलब है कि MP में हर 50वें व्यक्ति में सिकल सेल का जीन मौजूद है. सबसे डराने वाली बात ये है कि देशभर में जितने सिकल सेल मरीज चिह्नित हुए हैं, उनका 59.28% यानी लगभग 60 फीसदी हिस्सा अकेले ओडिशा और मध्य प्रदेश में है. मरीजों की संख्या में ओडिशा 1,06,969 के साथ पहले और MP 40,741 के साथ दूसरे नंबर पर है

छत्तीसगढ़ में एमपी से कम मरीज

जांच के मामले में छत्तीसगढ़ 1.78 करोड़ के साथ पहले नंबर पर है, लेकिन वहां मरीजों की संख्या 28,384 है जो MP से कम है. MP सरकार ने जनजातीय बहुल जिलों को टारगेट किया है. आयुष्मान आरोग्य मंदिर, PHC और जिला अस्पतालों में 0-40 साल के लोगों की फ्री जांच हो रही है. मरीजों को हाइड्रोक्सीयूरिया और फॉलिक एसिड की दवा मुफ्त दी जा रही है. सभी मरीजों की डिजिटल ट्रैकिंग भी की जा रही है ताकि समय पर इलाज मिल सके.

क्या है सिकल सेल?

इस बीमारी में खून की कोशिकाएं हंसिए जैसी हो जाती हैं. इससे शरीर में दर्द, कमजोरी और अंग खराब होने का खतरा रहता है. वाहक को बीमारी नहीं होती पर वो जीन अगली पीढ़ी को दे सकता है. इसलिए शादी से पहले स्क्रीनिंग जरूरी बताई जा रही है. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि लक्ष्य 100% स्क्रीनिंग और समय पर इलाज का है.

आम लोगों के लिए जरूरी जानकारी

वाहक कौन होता है? जिसे माता-पिता में से एक से दोषपूर्ण जीन मिलता है. उसे बीमारी नहीं होती पर वो जीन आगे पास कर सकता है.
मरीज कौन होता है? जिसे माता-पिता दोनों से दोषपूर्ण जीन मिलता है. उसे दर्द, एनीमिया और अंगों को नुकसान हो सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि शादी से पहले स्क्रीनिंग और समय पर इलाज से इस बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है.

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