सोशल मीडिया पर वायरल हुई राजगढ़ की शादी, पुलिस ने माता-पिता, पंडित, हलवाई पर दर्ज किया केस, जानें क्या है मामला

Rajgarh Viral Marriage: पुलिस ने मामले में बालक-बालिका के माता-पिता के साथ टेंट संचालक, घोड़ी संचालक, प्रिंटिंग प्रेस संचालक, हलवाई और पंडित सहित अन्य सहयोगियों को आरोपी बनाया है. सभी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.
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सोशल मीडिया पर वायरल हुई राजगढ़ की शादी

MP News: राजगढ़ में बाल विवाह की कुप्रथा एक बार फिर सामने आई है. भोजपुर थाना क्षेत्र के कुशलपुरा गांव में महज 8 साल की बच्ची का विवाह 9 साल के बालक से कर दिया गया. हैरानी की बात यह रही कि प्रशासनिक टीम एक दिन पहले ही गांव में जांच के लिए पहुंची थी, बावजूद इसके बाल विवाह को रोका नहीं जा सका. मामले का खुलासा तब हुआ जब शादी की रस्मों हल्दी, मेहंदी और बारात की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई. इसके बाद प्रशासन हरकत में आया.

आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी खिलचीपुर संतोष चौहान की शिकायत पर थाना भोजपुर में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 10 और 11 के तहत मामला दर्ज किया गया. जांच के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम मौके पर पहुंची, जिसमें संतोष चौहान और जिला समन्वयक रजनी प्रजापति (आहिंसा वेलफेयर सोसायटी) शामिल रहीं. आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और ग्राम चौकीदार के बयान के आधार पर बाल विवाह की पुष्टि की गई और पंचनामा तैयार किया गया.

जांच के बाद भी हुई चूक

जानकारी के अनुसार, प्रशासन को पहले ही बाल विवाह की सूचना मिल चुकी थी. टीम गांव पहुंची, लेकिन ग्रामीणों ने दूसरे दूल्हे की जानकारी देकर टीम को गुमराह कर दिया. अगले ही दिन विवाह संपन्न हो गया, जिससे निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े हो गए हैं.

इन पर दर्ज हुआ केस

पुलिस ने मामले में बालक-बालिका के माता-पिता के साथ टेंट संचालक, घोड़ी संचालक, प्रिंटिंग प्रेस संचालक, हलवाई और पंडित सहित अन्य सहयोगियों को आरोपी बनाया है. सभी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.

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दूसरा मामला भी आया सामने

इसी बीच करनवास थाना क्षेत्र में भी 9 वर्षीय बच्ची की सगाई कर 26 अप्रैल को विवाह तय किए जाने का मामला सामने आया है. रिश्तेदारों द्वारा लिए गए इस फैसले में ‘झगड़े’ के नाम पर 9 लाख रुपए की मांग भी सामने आई है. परिजनों ने इसकी शिकायत पुलिस और महिला बाल विकास विभाग से की है. लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने प्रशासनिक तैयारियों और जागरूकता अभियानों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. साफ है कि बाल विवाह रोकने के लिए सख्ती के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है.

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