ना पानी, ना RO मशीन कुछ नहीं रहने देंगे! इंदौर में राहगीरों के लिए लगाया गया 3.5 करोड़ का ‘आधुनिक प्याऊ’ गायब; HC ने मांगा जवाब

मशीनें कहां चली गईं हैं, इसका किसी के पास जवाब नहीं है. याचिका सुनने के बाद हाई कोर्ट ने इंदौर नगर निगम से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है.
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MP News: सरकार स्मार्ट सिटी योजना के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. लेकिन उसका फायदा जनता को नहीं मिल पा रहा है. इसकी नई बानगी इंदौर में दिखाई दे रहा है. यहां स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सरकार ने राहगीरों के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये की आरओ मशीनें लगाई गई थीं. लेकिन मशीनें गायब हो गई. इसको लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इंदौर नगर निगम से जवाब मांगा है.

RO मशीनें कहां गई हैं, इसका पता नहीं?

महेश गर्ग नाम के याचिकाकर्ता ने कोर्ट में जानकारी दी थी कि करोड़ों रुपये खर्च करके इंदौर के विभिन्न इलाकों में आरओ मशीनें लगाई गई थीं. लेकिन ये मशीनें कहां चली गईं हैं, इसका किसी के पास जवाब नहीं है. याचिका सुनने के बाद हाई कोर्ट ने इंदौर नगर निगम से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है.

कोर्ट ने मुख्य सचिव नगरीय प्रशासन विभाग, निगमायुक्त, कार्यपालन यंत्री नर्मदा जल वितरण विभाग, अधीक्षण यंत्री को नोटिस जारी किया है. अब मामले में अगली सुनवाई 15 जून की मुकर्रर की है.

साढ़े तीन करोड़ खर्च लेकिन जनता प्यासी!

मध्य प्रदेश में इन दिनों भीषण गर्मी का दौर जारी है. ऐसे में सरकार ने तो आधुनिक प्याऊ यानी कि आरो वाटर के लिए शहर के प्रमुख इलाकों के चौराहों पर मशीने लगा दीं, लेकिन इसका लाभ जनता को नहीं मिल पा रहा है. भीषण गर्मी में राहगीर पानी की बोतल खरीदकर पी रहे हैं. पानी के लिए कोई इंतजाम नहीं है. जबकि सरकार ने जिस स्मार्ट सिटी योजना के नाम पर साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इसमें निर्धारित किया गया था कि 10 साल तक ये मशीनें चलेंगी और हर साल इसका रखरखाव किया जाएगा. लेकिन रख-रखाव तो तब किया जाएगा, जब मशीनें होंगी. करोड़ों की मशीनें कहां गायब हो गईं, ये जिम्मेदारों को भी नहीं पता है.

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