MP News: ‘हमें हमारा हाई स्कूल दे दो…’, छात्रों ने हाथों में पंपलेट और खाली स्कूल बैग लेकर कलेक्टर से लगाई गुहार
बच्चाें ने कलेक्टर से लगाई गुहार
रिपोर्ट – यश खरे
MP News: मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन जहां एक ओर ‘स्कूल चले अभियान’ के तहत बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई गांव ऐसे भी हैं जहां हाई स्कूल की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है. ऐसे में बच्चों के सामने पढ़ाई जारी रखना बड़ी चुनौती बन गया है. ऐसा ही मामला कटनी जिले की बहोरीबंद विधानसभा के ग्राम चरगवा से सामने आया है, जहां बड़ी संख्या में छात्र अपने परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और हाई स्कूल की मांग को लेकर प्रदर्शन किया.
छात्र हाथों में पंपलेट और खाली स्कूल बैग लेकर पहुंचे
छात्र अपने हाथों में पंपलेट और खाली स्कूल बैग लेकर पहुंचे थे. पंपलेट पर लिखा था – ‘तुम हमें स्कूल दो, हम तुम्हें शिक्षित भारत देंगे.’ बच्चों का कहना था कि उनके हाथों में खाली बस्ता इसलिए है क्योंकि गांव में हाई स्कूल नहीं होने के कारण उन्हें शिक्षा पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपर कलेक्टर को अपनी समस्याएं बताईं और प्रतीकात्मक रूप से खाली बस्ता भी सौंपा, ताकि प्रशासन उनकी परेशानी को समझ सके और गांव में हाई स्कूल शुरू कराने की दिशा में कदम उठाए.
गांव से करीब 8 किलोमीटर दूर है स्कूल
छात्रों ने बताया कि उन्हें पढ़ाई के लिए अपने गांव से करीब 8 किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ता है. वे सुबह 6 बजे स्कूल के लिए निकलते हैं और शाम 6 बजे तक घर लौट पाते हैं. लंबे सफर और थकान के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है. छात्रों का कहना है कि इतनी दूर आने-जाने में ही पूरा दिन निकल जाता है, जिससे उन्हें पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता.
परिजन बोले- स्कूल भेजना मजबूरी
वहीं परिजनों ने भी अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को पढ़ाना तो चाहते हैं, लेकिन गांव से इतनी दूर स्कूल भेजना मजबूरी बन गया है. बच्चों का अधिकांश समय रास्ते में ही निकल जाता है, जिसके कारण वे घर पर पढ़ाई नहीं कर पाते. अभिभावकों का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि बच्चों की आगे की पढ़ाई कैसे जारी रखी जाए.
स्थानीय समाजसेवी अनिल सिंह सेंगर ने बताया कि ग्रामवासी पिछले कई वर्षों से गांव में हाई स्कूल खोलने की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि हाई स्कूल नहीं होने के कारण बच्चों को रोजाना लंबी दूरी तय कर पढ़ने जाना पड़ रहा है, जिससे उनकी शिक्षा और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं.
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