‘वेद, पुराण किसमें लिखा है रावण दहन…’, उज्जैन में दशहरे पर बवाल, जानें क्या है मामला

MP News: अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने शहर की चार प्रमुख दशहरा उत्सव समितियों को कानूनी नोटिस भेजकर पूछा है कि किस वेद, पुराण या शास्त्र में दशहरे पर रावण दहन का उल्लेख है.
Uproar in Ujjain on Dussehra

उज्जैन में दशहरे पर बवाल

MP News: उज्जैन में दशहरे पर होने वाले रावण दहन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने शहर की चार प्रमुख दशहरा उत्सव समितियों को कानूनी नोटिस भेजकर पूछा है कि किस वेद, पुराण या शास्त्र में दशहरे पर रावण दहन का उल्लेख है. नोटिस में सात दिन के भीतर शास्त्रीय प्रमाणों के साथ जवाब देने को कहा गया है. ऐसा नहीं करने पर अदालत में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.

रावण दहन से ब्राह्मण समाज को आपत्ति

अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी की ओर से अधिवक्ता अश्विन चौधरी ने ये नोटिस जारी किए हैं. समाज का तर्क है कि रावण वेदों का ज्ञाता, महाविद्वान और भगवान शिव का परम भक्त था. ऐसे में हर साल उसका पुतला जलाने से उसके व्यक्तित्व और चरित्र को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. समाज के मुताबिक, दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है.

धार्मिक ग्रंथों का दिया हवाला

नोटिस में श्री रामचरितमानस सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि रावण दहन से संबंधित मान्यताओं को स्पष्ट किया जाना चाहिए. इसमें दावा किया गया है कि पद्मपुराण, वाल्मीकि रामायण और स्कंद पुराण के अनुसार रावण का वध चैत्र मास की शुक्ल चतुर्दशी को हुआ था. इसी आधार पर आश्विन शुक्ल दशमी को रावण दहन करने की परंपरा पर सवाल उठाए गए हैं.

आयोजकों से पूछे गए सवाल

अधिवक्ता ने समितियों से पूछा है कि आश्विन शुक्ल दशमी को रावण वध होने का उल्लेख किस शास्त्र या पुराण में मिलता है. नोटिस में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि भगवान श्रीराम के बाण से रावण को मोक्ष प्राप्त हुआ था, तो हर साल उसका दहन किस आधार पर किया जाता है. समाज ने गलत तिथि पर रावण दहन को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा है.

इन चार समितियों को मिला नोटिस

नोटिस पाने वालों में लाला ओम अमरनाथ खत्री दशहरा उत्सव समिति के संयोजक शिवा खत्री, कार्तिक मेला दशहरा उत्सव समिति के संयोजक चेतन यादव, सिद्धवट दशहरा उत्सव समिति के संयोजक राघवेंद्र चतुर्वेदी और शास्त्रीनगर दशहरा उत्सव समिति के संयोजक विजयसिंह दरबार शामिल हैं. सभी समितियों को सात दिन में जवाब देने को कहा गया है. जवाब नहीं मिलने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.

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