एमपी का यह गांव कहलाता है ‘सरकारी नौकरी की फैक्ट्री’, यहां से निकले कई जज, कुलपति और सांसद
MP Village Sarkari Naukri: वर्तमान में मध्य प्रदेश में कुल 55 जिले हैं. ये सभी जिले और इनके अंतर्गत आने वाले गांव किसी न किसी खास वजह से प्रदेश में अपना प्रमुख स्थान रखते हैं. कोई जिला या तो खेती-बाड़ी के लिए प्रसिद्ध है, कोई सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखने में, तो कोई शिक्षा या विज्ञान के क्षेत्र में. एमपी का हर जिला किसी न किसी वजह से मशहूर है. ऐसा ही यहां का एक गांव है, जिसे 'सरकारी नौकरी की फैक्ट्री' कहा जाता है. इस गांव के लोग एक सिपाही से लेकर न्यायाधीश, एडीजीपी और कुलपति जैसे बड़े पदों पर विराजमान हैं. आइए जानते हैं मध्य प्रदेश के उसी गांव के बारे में.
एमपी के इस गांव में महानगरों की तरह हवाई पट्टी है और यहां पर मराठा रेजीमेंट भी मौजूद है.
बुंदेलखंड के सागर जिले में स्थित एक छोटा सा गांव ढाना है, जिसे सरकारी नौकरी का फैक्ट्री कहा जाता है.
इस जगह ने छोटे सिपाही से लेकर ADGP जैसे बड़े पुलिस अधिकारी और माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice-Chancellor) तक दिए हैं.
ढाना गांव के लगभग 80 प्रतिशत घरों से लोग डॉक्टर, जज, इंजीनियर, वैज्ञानिक और सेना जैसे बड़े सरकारी पदों पर सेवा दे रहे हैं.
यहां के बाकी बचे लोग भी खाली नहीं हैं. वे या तो अपनी बेहतरीन खेती संभाल रहे हैं या प्राइवेट सेक्टर में अच्छी नौकरियों में हैं.
ढाना गांव 10,000 की आबादी में से 1,500 से ज़्यादा लोग सरकारी नौकरियों में हैं, जिनमें पूर्व डीआईजी एम.के. पटेरिया और पूर्व सांसद नर्मदा प्रसाद राय जैसी बड़ी हस्तियां शामिल हैं.
यहां के युवाओं में उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) के प्रति गहरी जागरूकता ही इस गांव की बड़ी सफलता की मुख्य वजह है.
गांव के शिक्षक प्रभात चौरसिया के 14 सदस्यों वाले परिवार में उनकी मां और चाची को छोड़कर पत्नी, भाई, चाचा और भाभी सहित कुल 9 लोग सरकारी शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं.