Vat Savitri Vrat 2026: पति की लंबी उम्र के लिए रखें वट सावित्री व्रत, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व
वट सावित्री व्रत 2026
Rituals for Husband’s Long Life: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ महीने की अमावस्या का खास महत्व माना जाता है. इसी दिन वट सावित्री व्रत रखा जाता है, जिसका महिलाओं को पूरे साल इंतजार रहता है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है. साथ ही परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. यह व्रत ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से शुरू होता है और अमावस्या के दिन इसकी मुख्य पूजा की जाती है. ऐसे में आइए जानते हैं साल 2026 में वट सावित्री व्रत कब रखा जाएगा और शुभ मुहूर्त क्या होगा.
वट सावित्री व्रत 2026 कब है?
- ज्योतिषियों के अनुसार, साल 2026 में ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 14 मई दिन गुरुवार को यानी आज पड़ रही है.
- इसलिए इसी दिन से वट सावित्री व्रत की शुरुआत मानी जाएगी.
- वहीं मुख्य पूजा और व्रत का विशेष दिन 16 मई दिन शनिवार यानी ज्येष्ठ अमावस्या को रहेगा.
वट सावित्री व्रत 2026 शुभ मुहूर्त
वट सावित्री व्रत की पूजा पूरे दिन की जा सकती है, लेकिन शुभ मुहूर्त में पूजा करना अधिक फलदायी माना जाता है. 16 मई को पूजा के लिए ये शुभ समय रहेंगे.
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:56 बजे से 12:49 बजे तक
सुबह शुभ समय: सुबह 07:27 बजे से 09:06 बजे तक
दोपहर शुभ समय: दोपहर 12:23 बजे से 02:01 बजे तक
कैसे करें वट सावित्री व्रत-पूजा?
- 16 मई शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. इसके बाद हाथ में पानी, चावल और फूल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें.
- पूजा के समय मन शांत रखें और किसी भी तरह के नकारात्मक विचारों से दूर रहें.
- शुभ मुहूर्त से पहले पूजा में काम आने वाली सभी चीजें एक जगह तैयार करके रख लें.
- पूजा के लिए एक टोकरी में सात प्रकार के अनाज रखें. इसके ऊपर भगवान ब्रह्मा और माता सावित्री की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें.
- फिर बरगद के पेड़ के नीचे विधि-विधान से पूजा करें. साथ ही भगवान शिव-पार्वती, यमराज और सावित्री-सत्यवान का भी पूजन करें.
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पूजा के समय इस मंत्र का जाप करें
अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते
पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्ध्यं नमोस्तुते.
बरगद के पेड़ में जल चढ़ाएं और यह मंत्र बोलें
वट सिंचामि ते मूलं सलिलैरमृतोपमै:
यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोसि त्वं महीतले
तथा पुत्रैश्च पौत्रैस्च सम्पन्नं कुरु मां सदा.