‘पति को नपुंसक बताना मानहानि नहीं’, इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से पत्नी को राहत

Allahabad HC Major Verdict: पति ने अपनी ही पत्नी पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था. जिसमें बताया कि पत्नी नपुंसक बोलती है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस समन आदेश को ही खारिज कर दिया.
Allahabad Highcourt

इलाहाबाद हाई कोर्ट

Calling Husband Impotent Not Defamation: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पति-पत्नी के मामले में एक अहम फैसला सुनाया है. पति ने अपनी ही पत्नी पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था. जिसमें बताया कि पत्नी नपुंसक बोलती है. कोर्ट ने इस समन आदेश को ही खारिज कर दिया. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पत्नी ने किसी गलत नीयत से यह बयान नहीं दिया है. उसका बयान पति की मेडिकल रिपोर्ट से साबित होता है. हाई कोर्ट में यह फैसला जस्टिस अचल सचदेव की सिंगल बेंच ने दिया है.

यह मामला एक पति द्वारा बीएनएस की धारा 528 के तहत अपनी पत्नी के ऊपर दर्ज कराया गया था. जिसमें आरोप था कि पति को पत्नी नपुंसक बोलती है. जिसकी वजह से समाज में छवि खराब होती है. इस मामले को निचली अदालत ने संज्ञान में लिया और महिला को समन जारी कर दिया. जिसके बाद महिला ने मानहानि वाले मामले में जारी समन के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच गई. जहां पत्नी ने बताया कि पति द्वारा लगाए गए आरोप वास्तविक तथ्यों पर आधारित हैं.

क्या है मामला?

दरअसल, महिला की शादी साल 2022 में हुई थी, लेकिन उसका पति शारीरिक सुख देने में सक्षम नहीं था. जिसकी वजह से पति को कई बार नपुंसक बोलकर ताना मारा. हालांकि, पति ने जांच भी कराई तो पोटेंसी टेस्ट में हार्मोन स्तर कम पाए गए. पति को जब महिला ने नपुंसक बोला तो वह मानहानि का मुकदमा दर्ज करा दिया, जिस पर निचली अदालत ने समन जारी किया, तो महिला ने हाई कोर्ट का दरबाजा खटखटाया. इस दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महिला की बातों को सुनते हुए समन खारिज करने के आदेश दिए.

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हाई कोर्ट ने रद्द किया समय आदेश

कोर्ट ने सभी पक्षों को सुना और माना कि ऐसा आरोप चोट पहुंचाने के इरादे से नहीं लगाया गया है, बल्कि एक वास्तविक शिकायत के रूप में लगाया गया है. यह मामला तलाक का आधार हो सकता है. हाई कोर्ट ने यह भी माना कि ट्रायल कोर्ट ने तथ्यों और कानूनी प्रावधानों पर सही ढंग से विचार नहीं किया. इसलिए हाई कोर्ट ने निचली अदालत के समन आदेश को रद्द कर दिया.

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