चीन का ड्रीम प्रोजेक्ट CPEC हमेशा के लिए बंद! बलूच विद्रोहियों के कारण हालात खराब
चीनी कंपनी बंद
Gwadar Free Zone: पाकिस्तान के ग्वादर इलाके में चल रहे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) प्रोजेक्ट को बड़ा झटका लगा है. यहां काम कर रही एक चीनी कंपनी ने अपना प्लांट बंद करने का फैसला लिया है, जिससे न केवल निवेशकों की चिंता बढ़ी है बल्कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.
ग्वादर फ्री जोन में काम कर रही चीनी कंपनी ने कारोबार में लगातार आ रही दिक्कतों और नुकसान का हवाला देते हुए अपने ऑपरेशन पूरी तरह बंद कर दिए. कंपनी का कहना है कि मौजूदा हालात में व्यापार चलाना संभव नहीं रह गया था. इससे साफ है कि पाकिस्तान में चीन भी अपना कारोबार सही से नहीं कर पा रहा है.
कंपनी ने क्यों लिया इस तरह का फैसला?
कंपनी को लंबे समय से लॉजिस्टिक और नीतिगत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. तैयार माल के निर्यात में अड़चनें आ रही थीं, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ता ही जा रहा है. कई महीनों तक प्रशासन से बातचीत के बावजूद समाधान नहीं निकल सका है. कंपनी की तरफ से हालात सामान्य करने की कई बार कोशिश की गई है, इसके बाद भी कोई हल नहीं निकला. जिसके बाद कंपनी को इस तरह का फैसला लेना पड़ा है.
इस फैसले का सबसे बड़ा असर वहां काम कर रहे कर्मचारियों पर सीधे तौर पर पड़ने वाला है. प्लांट बंद होने के साथ ही सभी कर्मचारियों की छंटनी कर दी गई. हालांकि कंपनी ने दावा किया कि उसने कर्मचारियों का बकाया वेतन और अन्य भुगतान पहले ही कर दिया है. यानी कि कर्मचारियों के लिए कुछ महीनों का गुजारा दिया गया है.
क्यों शुरू किया गया था ग्वादर पोर्ट?
ग्वादर पोर्ट और इससे जुड़े प्रोजेक्ट CPEC का अहम हिस्सा हैं, जिसे चीन की बेल्ट एंड रोड पहल का प्रमुख स्तंभ माना जाता है. इस परियोजना के जरिए पाकिस्तान को आर्थिक मजबूती देने और क्षेत्र को व्यापारिक हब बनाने का लक्ष्य रखा गया था. लेकिन पिछले कुछ समय से ग्वादर में सुरक्षा, स्थानीय विरोध और आर्थिक चुनौतियों के कारण कई परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के घटनाक्रम विदेशी निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर सकते हैं.
ईरान-अमेरिका के बीच तनाव का भी असर
पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात भी क्षेत्रीय व्यापार पर असर डाल रहे हैं, जिसका अप्रत्यक्ष प्रभाव ऐसे प्रोजेक्ट्स पर पड़ रहा है. ग्वादर में चीनी कंपनी का यह कदम CPEC के लिए चेतावनी संकेत माना जा रहा है. अब पाकिस्तान सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह निवेशकों का भरोसा कैसे बनाए.
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