पंजाब में SIR की एंट्री से गरमाई सियासत! AAP-कांग्रेस ने उठाए सवाल, सता रहा बंगाल जैसा डर
अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान
Punjab SIR: पश्चिम बंगाल और बिहार के बाद अब पंजाब में भी वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी SIR शुरू होने जा रही है. चुनाव आयोग के इस कदम ने राज्य की राजनीति को गर्म कर दिया है. विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले शुरू हो रही इस कवायद को लेकर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों सवाल उठा रही हैं, जबकि बीजेपी इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़कर देख रही है. ऐसा नहीं है कि एसआईआर को लेकर पहली बार विरोध हो रहा है. जिन भी राज्यों में बीजेपी की सरकार नहीं है, वहां-वहां मौजूदा सरकार ने एसआईआर का विरोध किया है.
पंजाब में SIR प्रक्रिया जून महीने में शुरू हो सकती है. इसके तहत बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे. पुराने रिकॉर्ड, खासकर 2003 की वोटर लिस्ट, को आधार बनाकर नए डेटा का मिलान किया जाएगा. चुनाव आयोग का कहना है कि इसका मकसद मृत, डुप्लीकेट या स्थान बदल चुके मतदाताओं के नाम हटाना और पात्र नए वोटरों को जोड़ना है.
विपक्षी दलों को किस बात का डर?
एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों को डर है कि इस प्रक्रिया के बहाने बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं. यही वजह है कि वे इस प्रक्रिया का खुले तौर पर विरोध कर रहे हैं. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का कहना है कि जब यह प्रक्रिया जरूरी है तो इसे चुनाव के पहले ही पूरा क्या कराया जाता है. इसके कारण चुनाव का माहौल प्रभावित हो सकता है.
आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं और SIR को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. AAP को आशंका है कि उसके पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है. कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि मौजूदा सरकार को अपने कोर वोटर कटने का डर सता रहा है.
लाखों की संख्या में काट गए लोगों के नाम
एसआईआर प्रक्रिया के अब तक दो चरण पूरे हो चुके हैं. तीसरे चरण के तहत देश के 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया पूरी कराने का ऐलान किया गया है. पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों में SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने का मुद्दा पहले ही राजनीतिक विवाद बन चुका है. इसको लेकर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थीं. उन्होंने आरोप लगाया था कि इस प्रक्रिया के तहत लाखों लोगों ने नाम जानबूझकर काटे गए हैं. अब पंजाब सरकार को भी यही डर सता रहा है.
चुनाव आयोग लगातार यह स्पष्ट कर रहा है कि किसी भी असली मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा. पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होगी. अधिकारियों के मुताबिक ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद आपत्तियां और दावे दर्ज कराने का मौका भी दिया जाएगा. बहरहाल देखना होगा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एसआईआर को लेकर किस तरीके से विरोध दर्ज कराती है.
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