सागर: स्मार्ट सिटी मिशन तहत करोड़ों की बिल्डिंग फांक रही धूल, फेल होने की कगार पर ये चार प्रोजेक्ट

Sagar: मध्यप्रदेश के सागर में स्मार्ट सिटी मिशन के द्वारा बनाई गई करोड़ों रुपए की बिल्डिंग धूल फांक रही है. करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हुए ये प्रोजक्ट अब फेल होने की कगार पर है.
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धूल फांक रही करोड़ों रुपए की बिल्डिंग

Sagar/परशुराम शर्मा: मध्यप्रदेश के सागर में स्मार्ट सिटी मिशन के द्वारा बनाई गई करोड़ों रुपए की बिल्डिंग धूल फांक रही है. यहा पर प्रोजेक्ट स्थापित होने तो दूर की बात है. जब से यह बिल्डिंग बनकर तैयार हुई है कोई अधिकारी ने इन बिल्डिंगों की तरफ झांका भी नहीं है. यही वजह है कि यह बिल्डिंग क्रिकेट का मैदान तो रील बनाने का अड्डा सहित पक्षियों का बसेरा बन रही है.

चार प्रोजेक्ट फेल होने की कगार पर

दरअसल स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चार प्रोजेक्ट फेल होने की कगार पर हैं. इन्हें शुरू करने अफसर दो साल में ठीक ढंग से प्लानिंग ही नहीं बना पाए. ट्रांसपोर्ट नगर, इनक्यूबेशन सेंटर, वर्किंग वूमन हॉस्टल और मुख्य बस स्टैंड इन चार प्रोजेक्ट पर स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 60.29 करोड़ रुपए खर्च किए गए.

नए बस स्टैंड के निर्माण में लगे 22 करोड़

सबसे ज्यादा पैसा 22 करोड़ रुपए नए बस स्टैंड के निर्माण पर हुआ. अफसरों ने जितनी रुचि स्मार्ट सिटी का पैसा खर्च करने में दिखाई उतनी इन प्रोजेक्ट को शुरू करने में नहीं दिखा रहे. यही कारण है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा डेढ़ साल पहले ट्रांसपोर्ट नगर का लोकार्पण करने के बाद भी अब तक वहां एक भी ट्रांसपोर्टर नहीं पहुंचा. वर्किंग वूमन हॉस्टल भी खाली पड़ा है. करोड़ रुपए की लागत से बनी इस बिल्डिंग में धूल चढ़ रही है. केंद्र ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत बजट बंद कर दिया है.

अमावनी में 28 एकड़ जमीन पर 19.61 करोड़ रुपए की लागत से बना ट्रांसपोर्ट नगर सुबह-शाम बच्चों के क्रिकेट खेलने के काम आ रहा. यहां एक भी ट्रांसपोर्टर नहीं पहुंचा और पूरा नगर खाली पड़ा है. रात में सारी लाइटें बंद रहती हैं.

वर्किंग वूमन हॉस्टल में मधुमक्खियों का छत्ता लगा

पुराने आरटीओ कैंपस में स्मार्ट सिटी के तहत करोड़ रुपए की लागत से बने वर्किंग वूमन हॉस्टल में मधुमक्खियों का छत्ता लगा है और कबूतरों का बसेरा है. बिल्डिंग के मुख्य गेट पर लगा है. यह बिल्डिंग कामकाजी महिलाओं रहने के लिए अब तक शुरू नहीं हो पाई. वहीं रात के समय यह पूरा परिसर मानों शराबियों का मौखाना बन जाता है. परिसर में खाली पड़ी शराब की बोतलें बता रही हैं कि रात के समय इस परिसर की क्या होती है. खिड़कियां टूट चुकी है बोर्ड उखड़ चुके हैं.

स्पार्क इनक्यूबेशन सेंटर की बिल्डिंग में मकड़ी के जाले

वहीं 16.56 करोड़ रुपए की लागत से पुराने आरटीओ कैंपस में बनी स्पार्क इनक्यूबेशन सेंटर की बिल्डिंग में मकड़ी के जाले लगे हैं. 17 मई 2024 से पूरी बिल्डिंग खाली पड़ी है. शुरूआत में तो कुछ समय वेबिनार आयोजित हुए लेकिन ठीक ढंग से काम न करने के कारण एजेंसी को टर्मिनेट कर दिया.

वहीं राजघाट रोड पर 22 करोड़ रुपए की लागत से बना नया मुख्य बस स्टैंड युवाओं के रील बनाने के काम आ रहा है क्योंकि यहां से बसें तो चल नहीं रही हैं. बस स्टैंड परिसर की पूरी बिल्डिंग खाली पड़ी है. रात के समय अंधेरा रहता है. दिन में युवा यहां सिर्फ रील बनाने आते हैं.

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