Mandla News: मंडला में कुदरत का अनोखा करिश्मा, महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया, कुछ ही घंटों में उजड़ गईं खुशियां

Mandla News: जानकारी के अनुसार, यह खबर मंडला जिले के भुआ बिछिया विकासखंड की है. मंगलवार को घुटास नयेगांव निवासी रजनी सिंगराम पति गणेश सिंगराम को अचानक प्रसव पीड़ा हुई और उन्हें दोपहर करीब 12 बजे निजी वाहन द्वारा पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भुआ बिछिया लाया गया.
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सांकेतिक इमेज

Mandla News: हर मां और परिवार यही चाहता है कि उसके घर में बच्चों की किलकारी गूंजे और घर खुशियों से भरा रहे. मध्य प्रदेश के मण्डला जिले से एक भावुक और दुर्लभ मामला सामने आया है. जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भुआ बिछिया में मंगलवार को एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया. बच्चों के जन्म के बाद परिजनों की खुशी का ठिकाना न रहा, लेकिन शायद यह खुशी प्रकृति को सहन न हो सकी और जन्म के कुछ ही घंटों बाद चारों बच्चों की मृत्यु हो गई.

चार बच्चों को जन्म देने के कुछ ही घंटों बाद थमीं सांसें

जानकारी के अनुसार, यह खबर मंडला जिले के भुआ बिछिया विकासखंड की है. मंगलवार को घुटास नयेगांव निवासी रजनी सिंगराम पति गणेश सिंगराम को अचानक प्रसव पीड़ा हुई और उन्हें दोपहर करीब 12 बजे निजी वाहन द्वारा पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भुआ बिछिया लाया गया. खबरों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला दो बच्चों को जन्म दे चुकी थी. इसके बाद जब महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो कुछ घंटों बाद उन्होंने दो और बच्चों को जन्म दिया.

चंद घंटों में उजड़ गईं खुशियां

मात्र कुछ ही घंटों में महिला ने कुल चार बच्चों को जन्म दिया. अस्पताल के डॉक्टरों ने उन चारों बच्चों को बचाने की कोशिश की, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था, जिस वजह से उन नन्हें बच्चों को नहीं बचाया जा सका. जैसे ही एक के बाद एक बच्चों की मृत्यु की खबर परिजनों तक पहुंची, वैसे ही कुछ ही घंटों में परिवार की खुशी मातम में बदल गई.

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मैच्योर डिलीवरी से नहीं बच सकीं सांसें

चारों नवजात बच्चों की मौत के बाद परिवार के साथ-साथ पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉ. अनूप सिंह भवेदी के अनुसार, महिला का प्रसव नौ महीने पूरे होने के बाद होना था, लेकिन अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने के कारण उन्हें अस्पताल लाया गया. डॉक्टर ने बताया कि गर्भावस्था निर्धारित समय से लगभग सात सप्ताह पहले (प्री-मैच्योर) होने के कारण चारों नवजातों का शरीर पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया था, जिस वजह से उन्हें नहीं बचाया जा सका.

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