जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने बदला नियम, सरकारी के साथ निजी स्कूलों के शिक्षकों की भी लगेगी ड्यूटी

Census 2026 Rules Revised: केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक, अभी तक जनगणना में सिर्फ सरकारी टीचरों की ही ड्यूटी लगती थी. जिसमें नियमित पढ़ाई और स्कूल के दूसरे काम प्रभावित होने की शिकायतें आती रही हैं. अब ऐसी ही शिकायतें निजी स्कूलों से भी आने की संभावना है.
Census 2027

सरकारी के साथ निजी स्कूलों के शिक्षकों की भी जनगणना में लगेगी ड्यूटी

Private School Teachers Duty: केंद्र सरकार ने जनगणना को लेकर बड़ा फैसला लिया है. जनगणना नियम, 1990 में संशोधन करते हुए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के साथ ही निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी शामिल करने का रास्ता खोल दिया है. यानी कि अब निजी स्कूलों, कॉलेजों, सोसाइटियों और ट्रस्टों से जुड़े शिक्षकों को भी जनगणना ड्यूटी सौंपी जा सकेगी. पहले यह जिम्मेदारी सिर्फ सरकारी स्कूल के शिक्षकों को दी जाती थी. सरकार के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल है कि अगर निजी टीचर जनगणना में चले जाएंगे, तो पढ़ाएगा कौन?

केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक, अभी तक जनगणना में सिर्फ सरकारी टीचरों की ही ड्यूटी लगती थी. जिसमें नियमित पढ़ाई और स्कूल के दूसरे काम प्रभावित होने की शिकायतें आती रही हैं. अब ऐसी ही शिकायतें निजी स्कूलों से भी आने की संभावना है. हालांकि, अतिरिक्त शिक्षकों की भर्ती कर दबाव कम किया जा सकता है.

संसोधन के बाद दबाव होगा कम

केंद्र सरकार के इस संसोधन के बाद कर्मचारियों का दायरा बढ़ाया गया है. जिसमें सरकारी स्कूलों के अलावा निजी स्कूलों के भी टीचर जनगणना के लिए कार्य करेंगे. इसके अलावा अगर जरूरत पड़ी तो सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU), बैंकों और सरकारी व गैर-सरकारी विभागों के लिपिकों तथा अन्य कर्मचारियों को भी इस काम में लगाया जा सकता है. इससे शिक्षकों पर दबाव कम होगा और नियमित पढ़ाई का काम भी प्रभावित नहीं होगा.

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लाखों कर्मचारियों की पड़ेगी जरूरत

भारत सरकार 2011 के बाद 2027 में जनगणना करा रही है, जिसमें लाखों कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी. इसलिए सरकार ने जनगणना नियमों में संसोधन किया है. ऐसे में जनगणना कर्मचारियों की श्रेणी बढ़ाने से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ड्यूटी के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे. ऐसे में न तो किसी पर दबाव बढ़ेगा और न ही किसी का काम प्रभावित होगा.

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