DGCA के नए नियम से नाराज हुई हेलिकॉप्टर कंपनियां, चारधाम की उड़ानें बंद करने की चेतावनी
हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों में नाराजगी
Uttarakhand Char Dham Yatra: उत्तराखंड में होने वाली चारधाम यात्रा में हेलिकॉप्टर सेवाओं का बहुत बड़ा योगदान है. बड़ी संख्या में यात्री अपनी यात्रा उन्हीं के जरिए पूरा करते हैं. लेकिन, हर साल कोई न कोई हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार होता है. जिसके कारण श्रद्धालुओं को अपनी जान गंवानी पड़ती है. हाल ही में एक हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हुआ. जिसमें 6 लोगों की जान चली गई. इसके बाद DGCA ने नियमों को सख्त कर दिया. लेकिन इन नियमों से हेलिकॉप्टर चलाने वाली कंपनियां नाराज हैं. उन्होंने उड़ाने बंद करने तक की चेतावनी दी है.
नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चार धाम रूट पर चलने वाले हेलीकॉप्टर में दो पायलट रखना अनिवार्य कर दिया है. यह नियम 2 नवंबर से लागू होना है. हालांकि, हेलिकॉप्टर ऑपरेटर इस फैसले से सहमत नहीं हैं. उन्होंने नए नियम को आर्थिक रूप से नुकसानदायक बताया है. यही वजह है कि उन्होंने सोमवार से चारधाम की चार्टर उड़ानें बंद करने की चेतावनी दी.
हादसे के बाद DGCA ने नियम किए सख्त
दरअसल, 30 अक्टूबर को बद्रीनाथ से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस हादसे में पायलट समेत विमान में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई थी. घटना के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे. इसके बाद DGCA ने चारधाम रूट पर हेलीकॉप्टर संचालन के लिए नए निर्देश जारी किए. इनके तहत हर उड़ान में मुख्य पायलट के साथ एक योग्य सह-पायलट की मौजूदगी जरूरी होगी.
ऑपरेटरों ने DGCA को भेजा विरोध पत्र
नए नियम के विरोध में हेलिकॉप्टर कंपनियों ने 31 अक्टूबर को DGCA प्रमुख वीर विक्रम यादव को सामूहिक रूप से अपना पत्र भेजा. ऑपरेटरों का कहना है कि हर उड़ान में दो पायलट रखने से कंपनियों का खर्च काफी बढ़ जाएगा. इसके लिए अतिरिक्त पायलटों की व्यवस्था करनी होगी. साथ ही उनके रहने, आने-जाने और अन्य व्यवस्थाओं पर भी खर्च बढ़ेगा.कंपनियों का तर्क है कि मौजूदा किराये और सीमित कमाई के बीच इस अतिरिक्त खर्च को उठाना आसान नहीं है.
2 नवंबर से उड़ानें बंद करने की तैयारी
ऑपरेटरों ने साफ किया है कि जब तक DGCA नए नियमों की समीक्षा कर कोई ऐसा रास्ता नहीं निकालता, जिसे कंपनियां भी लागू कर सकें, तब तक वे चारधाम की चार्टर सेवाएं रोकने पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने DGCA और उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) से जल्द बैठक कर समाधान निकालने की मांग की है.
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