ममता बनर्जी की हार की वजह बने राजेंद्र राठौड़? क्या थी रणनीति, जिसने भवानीपुर में खिला दिया ‘कमल’

West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के जीत के पीछे के कई कारण हैं. इस चुनाव के लिए देशभर के बीजेपी कार्यकर्ताओं ने बंगाल में डेरा डाल रखा था. उसी का नतीजा है कि बीजेपी ने 200 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की है.
पश्‍च‍िम बंगाल में चला राजस्‍थान के नेताओं का जलवा!

पश्‍च‍िम बंगाल में चला राजस्‍थान के नेताओं का जलवा!

West Bengal Assembly Election Result 2026: पश्‍च‍िम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत के पीछे के कई कारण हैं. इनमें सबसे बड़ा कार्यकर्ताओं की मेहनत है. न सिर्फ बंगाल के कार्यकर्ताओं ने वहां मेहतन की बल्कि मध्‍यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, यूपी, बिहार के भी नेताओं ने वहां जमकर पसीना बहाया है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में BJP की ऐतिहासिक जीत सिर्फ स्थानीय नेताओं की मेहनत का नतीजा नहीं थी, बल्कि इसके पीछे राजस्थान के कई दिग्गज नेताओं की मजबूत रणनीति भी रही है.  पार्टी ने “मिशन बंगाल” के तहत राजस्थान के अनुभवी नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां देकर मैदान में उतारा था. यही दांव काम कर गया.  

दरअसल, BJP ने पहले ही समझ लिया था कि ममता बनर्जी के मजबूत गढ़ को तोड़ने के लिए सिर्फ रैलियां काफी नहीं होंगी, बल्कि ग्राउंड मैनेजमेंट, बूथ स्तर की पकड़ और रणनीतिक प्लानिंग जरूरी होगी. इसी रणनीति पर भारतीय जनता पार्टी ने भी काम किया.

कैसे बना राजस्थान मॉडल ‘गेम चेंजर’?

राजस्थान BJP के नेताओं को बंगाल में खास तौर पर बूथ मैनेजमेंट और संगठन मजबूत करना, स्थानीय कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग देना, चुनावी रणनीति बनाना और उसे लागू कराना, कमजोर सीटों पर खास फोकस जैसे कामों पर लगाया गया था. पार्टी ने अलग-अलग सीटों पर अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी दी, जिससे हर क्षेत्र में माइक्रो मैनेजमेंट हो सका.

ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और उनकी टीम ने मोर्चा संभाला था. भवानीपुर में कैसे काम करना है, कहां फोकस करना है. य‍ह पूरी रणनीति राजेंद्र राठौड़ ने ही तय की है.

इन नेताओं ने संभाला बंगाल में मोर्चा

इस काम के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, कैलाश चौधरी, केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव को चुनाव अभियान प्रभारी और बीजेपी राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. दोनों नेताओं ने पूरे चुनावी अभियान को संगठित और राजनीतिक तरीके से संचालित किया, जिसका असर नतीजों में साफ दिखाई दिया. इन नेताओं ने  कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर जाकर सीधे वोटरों से कनेक्ट बनाया और BJP के पक्ष में माहौल खड़ा किया. BJP ने करीब 11 वरिष्ठ नेताओं की टीम बनाकर उन्हें अलग-अलग इलाकों में तैनात किया था.

क्या थी उनकी रणनीति?

राजस्थान के नेताओं ने पन्ना प्रमुख मॉडल पर काम किया. इसके जरिए हर वोटर तक अपनी पहुंच दर्ज कराई. इसके अलावा लोकल इश्यू और नेशनल नैरेटिव का कॉम्बिनेशन बनाया, जिससे लोग बीजेपी की तरफ प्रभावित होते नजर आए.  खासतौर पर महिला वोट और नए वोटर्स पर फोकस करने बीजेपी के काम के बारे में बताया है. इसी रणनीति ने BJP को शहरी ही नहीं, ग्रामीण इलाकों में भी मजबूत किया. इसका नतीजा यह रहा कि बीजेपी ने 200 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की है.

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