MP में जेल सुधार एक्ट लागू करने की तैयारी, 10 दिनों में 4 IAS CS को सौंपेंगे रिपोर्ट
वल्लभ भवन भोपाल
MP News: मध्य प्रदेश में जेलों की व्यवस्था में बदलाव और बंदियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने प्रशासनिक प्रक्रिया तेज कर दी है. प्रदेश में जेल सुधार और बंदी पुनर्वास अधिनियम लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है. इसके लिए चार आईएएस अधिकारियों की समिति बनाई गई है, जिसे 10 कार्य दिवस में अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. समिति अधिनियम के प्रावधानों, नियमों और उनके क्रियान्वयन को लेकर सुझाव देगी. इसके बाद मुख्य सचिव के स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
4 IAS अधिकारी सौंपेंगे रिपोर्ट
दरअसल, मध्यप्रदेश विधानसभा में मध्यप्रदेश सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदी पुनर्वास अधिनियम-2024 पारित किया गया था. इसे 8 अगस्त 2024 को राज्यपाल की मंजूरी मिली और 12 अगस्त 2024 को राजपत्र में प्रकाशित किया गया. अधिनियम में कुल 68 धाराएं और 18 अध्याय हैं. हालांकि, कानून बनने के बाद भी इसके प्रावधानों को जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है. अब सरकार इसके नियमों को अंतिम रूप देकर क्रियान्वयन की तैयारी कर रही है. राज्य सरकर की तरफ से बनाई गई कमेटी में जेल विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश चंद्र गुप्ता, वित्त विभाग के सचिव लोकेश कुमार जाटव, इसके साथ ही विधि कार्य विभाग के सचिव मुकेश कुमार और जेल विभाग के उपसचिव कमल नगर को भी शामिल किया गया है.
सिर्फ दंड नहीं, सुधार और पुनर्वास पर जोर
इस अधिनियम का उद्देश्य जेल व्यवस्था को केवल अनुशासन और दंड तक सीमित रखने के बजाय बंदियों के सुधार, कौशल विकास और समाज की मुख्यधारा में पुनर्वास से जोड़ना है. इसमें बंदियों को कानूनी सहायता, शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सुविधाएं और परिवार से संपर्क जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने के प्रावधान हैं. इसके साथ ही बंदियों के अधिकारों और जेल प्रशासन की जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया है.
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पुराने तीन कानूनों की जगह लेगा नया अधिनियम
नया कानून लागू होने के बाद जेलों से जुड़े पुराने तीन कानूनों की जगह नई व्यवस्था लागू होगी. इसका उद्देश्य जेलों में आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना है. इसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, टेलीमेडिसिन, मोबाइल कनेक्टिविटी के जरिए संपर्क, कौशल प्रशिक्षण और बंदियों के पुनर्वास जैसे प्रावधान शामिल हैं.
सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से जेलों में व्यवस्थागत सुधार होगा और बंदियों को रिहाई के बाद सामान्य जीवन में लौटने के बेहतर अवसर मिल सकेंगे. अब चार आईएएस अधिकारियों की समिति की रिपोर्ट के बाद अधिनियम को लागू करने की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा.