MP में करोड़ों के फर्जी क्लेम में EOW का खुलासा, बीमार मजदूरों की मौत के बाद इंश्योरेंस पॉलिसी, गुजरात के एजेंट भी शामिल

गंभीर रूप से बीमार मजदूरों और किसानों को जाल में फंसाकर उनके नाम पर पॉलिसी करवाकर 16 करोड़ का फर्जी तरीके से क्लेम लिया गया.
Fake claim of Rs 16 crore in the name of insurance policy in MP.

एमपी में इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर 16 करोड़ का फर्जी क्लेम.

MP Insurance Fraud Exposed: मध्य प्रदेश में इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर ईओडब्ल्यू ने करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े को उजागर किया है. गंभीर रूप से बीमार मजदूरों और किसानों को जाल में फंसाकर उनके नाम पर पॉलिसी करवाकर 16 करोड़ का फर्जी तरीके से क्लेम लिया गया. जांच में पता चला कि पॉलिसी के कुछ दिनों बाद ही बीमारी से मौत हो गई. इसके बाद सामान्य मौत दिखाकर पॉलिसी के पैसे एकाउंट में ट्रांसफर किए गए. जांच में ये भी पता चला है कि कई लोगों की तो मौत के बाद उनकी पॉलिसी करवाई गई थी. इस खेल में मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात के एजेंट भी शामिल हैं.

बैक डेट में एंट्री करवाकर फर्जी प्रमाण पत्र लिए

ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि इसमें सरपंच, सचिव और बीमा एजेंट के अलावा इसमें जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के कारण ये पूरा खेल चल रहा था. मौत के बाद क्लेम लेने के लिए बैक डेट में एंट्री के लिए फर्जी प्रमाण पत्र लिए गए. इसमें आईसीआईसीआई प्रू डेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के द्वारा पॉलिसी जारी की गई थी.

उज्जैन की रहने वाली जयकुंवार नाम की महिला की मौत साल 2023 में ही हो गई थी, लेकिन जयकुंवार के नाम पर साल 2024 में 44500 रुपये की पॉलिसी ली गई. साथ ही पूरा क्लेम भी एकाउंट में ट्रांसफर करवा लिया गया. उज्जैन में जयकुंवार नाम की महिला की मौत 2023 में हो गई थी
2024 में 44 500 की पॉलिसी ली.जबकि एक अन्य बालू सिंह नाम के व्यक्ति की साल 2023 में 36, 576 रुपये की पॉलिसी करवाई गई. लेकिन मौत के 64 दिन बाद ही व्यक्ति की मौत हो गई. जांच में बता चला कि क्लेम में फर्जी डेथ सर्टिफिकेट लगाया गया था.

उज्जैन में सबसे ज्यादा मामले, 39 लोगों पर FIR

इंश्योरेंस करवाकर फर्जी तरीके से क्लेम लेने के सबसे ज्यादा मामले उज्जैन में सामने आए हैं. उज्जैन ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया है कि उज्जैन में सबसे ज्यादा 8 करोड़ रुपये का क्लेम लिया गया है. उज्जैन में सबसे ज्यादा 27, जबकि इंदौर, ग्वालियर, भिंड, मुरैना और छिंदवाड़ा को मिलाकर कुल 32 मामले दर्ज किए गए हैं.

इस पूरे खेल में सिस्टम की बड़ी लापरवाही और मिलीभगत सामने आई है. सरपंच, सचिव और बीमा एजेंट समेत 39 लोगों पर FIR दर्ज करवाई गई है.

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