CG News: छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत कक्षा पहली में प्रवेश प्रक्रिया की धीमी रफ्तार को लेकर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है. इस मामले में राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश के करीब 400 स्कूलों में एडमिशन के लिए किसी का भी आवेदन नहीं आया है.
CG High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मृतक कर्मचारियों के परिजनों के हित में एक जरूरी फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि किसी कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिवार को दी जाने वाली सहायता राशि (मुआवजा) की गणना किसी पुरानी या काल्पनिक वेतन सीमा के आधार पर नहीं की जा सकती.
CG News: जमीन विवाद को लेकर गायकवाड़ परिवार के तीन लोगाें की हत्या मामले में हत्या के आरोपी पिता-पुत्र की अपली को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है.
Bilaspur: बिलासपुर में साइंस कॉलेज मैदान के कमर्शियल इस्तेमाल का मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है. हाई कोर्ट ने कलेक्टर को तीन दिन के भीतर इस विवाद के निपटारे की बात कही है.
CG News: बहू के व्यवहार से दुखी होकर सास ने हाई कोर्ट में अपील की. अदालत में सास ने कहा कि राज्य सरकार ने बेटे की मौत के बाद बहू को इस शर्त पर नौकरी दी गई कि देखभाल और भरण पोषण करेगी. ज्ञांती तिवारी ने याचिका में कहा कि बहू उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करती है
CG Coal Levy Scam: हाई कोर्ट ने कोरबा की पूर्व व निलंबित कलेक्टर रानू साहू के रिश्तेदारों की संपत्ति अटैच करने के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस कार्रवाई के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है.
CG News: छत्तीसगढ़ के शिक्षकों को बिलासपुर हाई कोर्ट से राहत भरी खबर सामने आई है. कोर्ट ने पुरानी पेंशन योजना को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में शिक्षकों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है.
CG News: छत्तीसगढ़ में जबरन धर्मांतरण को रोकने लिए 'छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य (संशोधन) विधेयक 2026' लागू हो गया है. वहीं इसे लेकर विवाद भी चल रहा था, जो अब हाई कोर्ट पहुंच गया है. मसीही समाज के प्रतिनिधि क्रिस्टोफर पॉल ने इस विधेयक के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है.
CG High Court: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मुंगेली के चर्चित पॉक्सो मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी दीपक वैष्णव को बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि केवल पीड़िता के नाबालिग होने के आधार पर दोष तय नहीं किया जा सकता.
CG High Court: हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि 101 दिन की देरी काफी अधिक है. दिए गए कारण सामान्य और अस्पष्ट हैं. केवल प्रशासनिक कारण पर्याप्त कारण नहीं माने जा सकते. कोर्ट ने कहा कि देरी माफी कोई अधिकार नहीं, बल्कि न्यायालय का विवेकाधिकार है.