Ketu Nakshatra Parivartan: ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक केतु को पाप का ग्रह माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार नक्षत्र परिवर्तन 29 मार्च 2026 को हो चुका है, जो 5 दिसंबर 2026 तक रहेगा. केतु के गोचर से कुछ राशियों पर प्रभाव परेशान करने वाला रहेगा.
Mangal Nakshatra 2026: मेष राशि के जातकों के लिए मंगल का यह बदलाव बेहद शुभ रहने वाला है. इस दौरान आपको फंसा हुआ पैसा वापस मिल सकता है, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी और पदोन्नति यानी प्रमोशन के योग बनेंगे.
Hanuman Jayanti 2026: इस साल हनुमान जयंती पर पूजा करने के लिए दो खास समय यानी मुहूर्त बताए गए हैं. सुबह का शुभ समय 6:10 से 7:44 बजे तक था, जो अब बीत चुका है. लेकिन परेशान होने की बात नहीं है, क्योंकि शाम को 6:39 से रात 8:06 बजे तक पूजा का एक और बेहतरीन मुहूर्त है.
Mangal Gochar 2026: ज्योतिषीय नजरिए से मंगल का यह गोचर केवल व्यक्तियों पर ही नहीं बल्कि देश और दुनिया पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है. इसके चलते राजनीति, समाज और प्राकृतिक आपदाओं जैसे क्षेत्रों में बड़ी हलचल या बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
Chaitra Purnima 2026: स्नानदान के लिए 2 अप्रैल का दिन शुभ माना गया है. पवित्र नदियों, सरोवर और पोखरों में स्नान के लिए सही समय उदयातिथि को माना गया है. 2 अप्रैल को पूर्णिमा उदयातिथि के समय रहेगी, इसलिए ये तिथि स्नान और दान के लिए शुभ मानी गई है.
Chaitra Navratri 2026: ज्योतिषियों के अनुसार, दुर्गाष्टमी का दिन बहुत ही विशेष रहने वाला है, क्योंकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बन रहा है. सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 4 बजकर 19 मिनट से शुरू होकर 27 मार्च की सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगा.
Chaitra Navratri 2026: मां कालरात्रि की सच्चे मन से पूजा करने पर दुश्मनों और विरोधियों का अंत होता है. किसी भी व्यक्ति पर तंत्र-मंत्र या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव होता है तो मां की पूजा करने से दूर हो जाता है. ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक मां कालरात्रि की पूजा करने से शनि ग्रह का अशुभ असर खत्म हो जाता है.
Garud Puran: गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जब मृत्यु निकट होती है, तो व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होने लगती है. सांसों की गति में अचानक परिवर्तन आने लगता है. कभी यह बहुत तेज हो जाती है, तो कभी धीमी.
Hanuman Jayanti 2026: हिंदू धर्मशास्त्रों के मुताबिक जिस दिन पूर्णिमा तिथि सूर्य उदय के समय हो तो उस दिन पूर्णिमा व्रत किया जाता है. हनुमान जयंती चैत्र महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है.
Chaitra Navratri: देवी कात्यायनी को ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री माना जाता है. चार भुजाओं वाली देवी का स्वरूप अद्भुत लगता है. सिंह की सवारी करती हैं. एक हाथ में तलवार और दूसरे में कमल करती हैं. वहीं, दूसरी ओर निचला दायां हाथ वरद मुद्रा यानी वरदान देने की स्थिति में होता है.