अभी नहीं बदलेगा बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम, टला फैसला

दरअसल पिछले कुछ दिनों से बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम बदलने को लेकर एमपी की सियासत गरमाई हुई है. जहां एक और भाजपा और हिंदू संगठन यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की मांग की जोर शोर से कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इसका विरोध कर रही है.
Barkatullah University (File Photo)

बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी(File Photo)

MP News: बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम बदले जाने का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में जाता नजर आ रहा है. बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल ने जून माह के शुरुआत में यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी करने की मंजूरी दे दी थी. लेकिन शासन की तरफ से अब तक इसको लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है, जिसके कारण फिलहाल अभी यूनिवर्सिटी का नाम नहीं बदला जाएगा.

नाम बदलने को लेकर सियासत गरमाई

दरअसल पिछले कुछ दिनों से बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम बदलने को लेकर एमपी की सियासत गरमाई हुई है. जहां एक और भाजपा और हिंदू संगठन यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की मांग की जोर शोर से कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इसका विरोध कर रही है. कांग्रेस का कहना है कि मुद्दों से भटकाने के लिए बीजेपी इस तरह की नाम बदलने की राजनीति करती है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बरकतउल्ला भोपाली महान स्वतंत्रता सेनानी थे. लेकिन बीजेपी जानबूझकर राजनीति कर रही है.

‘कांग्रेस को जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए’

बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस तुष्टिकरण के कारण हर अच्छे फैसले का विरोध करती है. कांग्रेस को जनभावनाओं का सम्मान करना चाहिए. लोग चाहते हैं कि यूनिवर्सिटी का नाम राजा भोज और विद्या की देवी वाग्देवी के नाम पर हो. लेकिन कांग्रेस हर देशहित के मुद्दों में अड़ंगा लगाती है.

कौन थे बरकतउल्ला भोपाली, जिनके नाम पर है यूनिवर्सिटी का नाम?

दरअसल बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी प्रदेश की जानीमानी यूनिवर्सिटी है. इसकी स्थापना 1970 में हुई थी. शुरू में इसका नाम भोपाल यूनिवर्सिटी ही थी, लेकिन बाद में स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतउल्लाह के नाम पर यूनिवर्सिटी के नाम में 1988 में बदवाल कर दिया गया.

बता दें मौलाना बरकतउल्लाह महान स्वतंत्रा सेनानी और प्रोफेसर थे. इनका जन्म भोपाल में हुआ था. उन्होंने मुंबई और लंदन में उच्च शिक्षा प्राप्त की. हिंदी के अलावा उर्दू, फारसी, अंग्रेजी, जर्मन समेत दुनिया की कई भाषाओं पर उनकी अच्छी पकड़ थी. आजादी की लड़ाई में उनका काफी योगदान था. वे गदर पार्टी से जुड़े थे, जिसनका उद्देश्य विदेशों में रह रहे भारतीयों को एकजुट करके भारत को अंग्रेजों से आजादी दिलाना था.

ये भी पढे़ं: ‘पहचान छिपाकर शादी करने पर हक नहीं छीन सकते’, लव जिहाद के मामले में HC का पीड़िता को 20 हजार हर महीने देने का आदेश

ज़रूर पढ़ें