Chaitra Navratri: देवी कात्यायनी को ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री माना जाता है. चार भुजाओं वाली देवी का स्वरूप अद्भुत लगता है. सिंह की सवारी करती हैं. एक हाथ में तलवार और दूसरे में कमल करती हैं. वहीं, दूसरी ओर निचला दायां हाथ वरद मुद्रा यानी वरदान देने की स्थिति में होता है.
Chaitra Navratri: तांत्रिक साधनाओं में माता स्कंदमाता का संबंध विशुद्ध चक्र से माना जाता है. वहीं, ज्योतिषशास्त्र में इन्हें बृहस्पति से जोड़कर देखा जाता है. नवरात्र के पांचवें दिन सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग बन रहे हैं.
Aaj Ka Rashifal: ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक ये अत्यंत शुभ और शक्तिशाली संयोग होता है जो हर तरह की मनोकामनाओं को पूरा करता है, इसके साथ ही सफलता प्रदान करता है. इसके साथ ही रवि योग भी बन रहा है. इन योग की वजह से कई राशियों के जातकों को लाभ मिलने वाला है
Mahalakshmi Rajyog 2026: ज्योतिषियों के अनुसार, चंद्रमा और मंगल की एक विशेष युति बनने जा रही है, जिससे महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण होगा. सबसे प्राचीन धर्म ग्रंथ वैदिक शास्त्र में महालक्ष्मी राजयोग को बहुत ही शुभ और फलदायी बताया गया है.
Guru Margi 2026: पुनर्वसु का अर्थ है 'फिर से बसना', जो जीवन में नई शुरुआत, धैर्य और सकारात्मकता का प्रतीक है. अगले 9 महीनों तक गुरु की यह स्थिति शिक्षा, भाग्य और धन के मामले में इन चार राशियों के लिए तरक्की के नए रास्ते खोलेगी और जीवन के अंधेरे को दूर कर खुशहाली लाएगी.
Chaitra Navratri 2026: मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, तप, संयम और आत्मबल की प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से उनकी पूजा करने पर भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं.
Chaturgrahi Yog 2026: द्रिक पंचांग के मुताबिक, इस समय मीन राशि में चंद्रमा, शनि, सूर्य और शुक्र ये चार बड़े ग्रह एक साथ मौजूद हैं. ज्योतिष में जब चार ग्रह एक ही राशि में मिलते हैं, तो इसे 'चतुर्ग्रही योग' कहते हैं, जिसका खास असर 20 मार्च तक रहेगा.
Chaitra Navratri 2026: नौ दिनों तक चलने वाला उत्सव मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना को समर्पित होता है, जिसमें पहले दिन पर्वतराज हिमालय की पुत्री मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है.
Chaitra Navratri 2026: द्रिक पंचांग के मुताबिक, चैत्र अमावस्या 18 मार्च की सुबह शुरू होकर 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे तक रहेगी. इसके तुरंत बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी, जो अगले दिन सुबह तक चलेगी. समय के इसी बदलाव की वजह से अमावस्या के धार्मिक काम और नवरात्रि की शुरुआत दोनों एक ही दिन यानी 19 मार्च को पड़ रहे हैं.
Chaitra Navratri 2026: 9 दिनों में भक्त मां दुर्गा की पूजा-पाठ करते हैं साथ ही व्रत भी रखते हैं. इन दिनों में मां दुर्गा की पूजा करने वाले सभी भक्तों पर मां दुर्गा का आर्शीवाद बना रहा है.