’24 घंटे से ज्यादा हिरासत में रखा तो करना होगा रिहा’, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Supreme Court Custody Ruling: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिरासत में लेने वाले अधिकारी को न केवल अनुच्छेद 22(2) द्वारा तय 24 घंटे की समय-सीमा का ध्यान रखना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि BNSS की धारा 58 के तहत हिरासत की अवधि 24 घंटे से ज्यादा न हो.
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सुप्रीम कोर्ट

24 Hour Detention Limit: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि अगर किसी को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में रखकर मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया तो रिहा करना होगा. इसका समय हिरासत में लेने से ही शुरू हो जाता है. पढे़ं सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने साफ कहा कि अगर किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से पहले 24 घंटे से ज्यादा समय तक हिरासत में रखा जाता है, तो उसे तुरंत हिरासत से रिहा कर दिया जाना चाहिए. इस समय को घटाया या बढ़ाया नहीं जा सकता है. हालांकि, इस दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो गिरफ्तारी की जगह से मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचने के लिए जरूरी समय को घटाया जा सकता है.

24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिरासत में लेने वाले अधिकारी को न केवल अनुच्छेद 22(2) द्वारा तय 24 घंटे की समय-सीमा का ध्यान रखना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि BNSS की धारा 58 के तहत हिरासत की अवधि 24 घंटे से ज्यादा न हो.

नियमों का नहीं हुआ पालन तो कर सकते हैं रिहा

इस दौरान SC ने यह भी कहा कि न्यायिक मजिस्ट्रेट का यह कर्तव्य भी है कि जब किसी आरोपी को उनके सामने पेश किया जाए, तो उसका हिरासत समय, डेट और पेश करने का टाइम नोट करें. खुद भी जांचें कि हिरासत का समय कहीं 24 घंटे से ज्यादा तो नहीं लिया गया. नियमों का सही से पालन हुआ कि नहीं. अगर ऐसा नहीं हुआ है तो हिरासत में लिए गए व्यक्ति को रिहा कर देना चाहिए.

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