बैतूल की बेटी बनीं प्रखरश्री दीदी, जज की परीक्षा पास की, जॉइनिंग से पहले चुना संन्यास
बैतूल की प्रखरश्री दीदी
Civil Judge Becomes Sadhvi: मध्य प्रदेश के बैतूल में रविवार (1 नवंबर 2026) को भव्य और दिव्य नजारा दिखाई दिया. आस्था, संयम, वैराग्य और भक्ति का अनोखा संगम देखने को मिला. जैन दीक्षा लेने जा रहीं पांच बहनों के सम्मान में बिनौली चल समारोह निकाला गया. इसमें नगर गौरव ब्रह्मचारिणी प्रखर श्री दीदी शामिल हुईं. वे बैतूल की रहने वाली है. उन्होंने माता-पिता की बात मानकर जज बनने के लिए परीक्षा दी और पास की. इसके बाद उन्होंने इस पद पर जॉइनिंग नहीं ली, इससे उलट उन्होंने संन्यास का रास्ता चुना.
उदयपुर से आया बैंड बना आकर्षण
बिनौली समारोह में विंटेज कार और बग्घियों ने शोभा बढ़ाई. राजस्थान के उदयपुर से आया बैंड आकर्षण का केंद्र बना. बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए. जैन धर्म के लोगों ने प्रखरश्री दीदी और दीक्षार्थी बहनों का फूल-मालाओं से स्वागत किया. जयकारों से उनका सम्मान किया गया. पांचों बहनें 22 नवंबर को दीक्षा लेंगी. सभी ने आदर भावना के साथ विदाई दी.
माता-पिता का सपना पूरा किया
बैतूल नगर गौरव ब्रह्मचारिणी प्रखरश्री दीदी ने बताया कि उनके माता-पिता का सपना था कि वे जज बनें. उन्होंने न्यायिक सेवा परीक्षा पास की और माता-पिता का सपना साकार किया. इस बात से इतर उनका मन बचपन से ही वैराग्य की ओर था. प्रखरश्री दीदी के अनुसार यदि वे जज या वकील के तौर पर कार्य करती तो वो सेवा नहीं दे पातीं, जो भगवान महावीर के सिद्धांतों पर चलकर हो सकती है. उन्होंने सिविल जज की नौकरी नहीं जॉइन नहीं की.
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लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ीं
प्रखरश्री दीदी की स्कूलिंग भोपाल के नामी स्कूल से हुई. स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अहमदाबाद से एलएलबी किया. पढ़ाई-लिखाई में अव्वल रहने वाली प्रखरश्री दीदी अपने बैच में गोल्ड मेडलिस्ट रहीं. उन्होंने आगे की शिक्षा के लिए लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स को चुना और पढ़ाई पूरी की. इतनी पढ़ाई करने के बाद उन्होंने नौकरी या बिजनेस नहीं बल्कि संयम और वैराग्य का रास्ता चुना.