‘इतने जूते खाने के बाद भी आ गया’, इंदौर में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने किसे बोला? जानें पूरा मामला

भाजपा के कार्यक्रम में पहुंचे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है. वह एक सामाजिक कार्यकर्ता के हाथ में पोस्टर देखकर भड़क उठे. आइए जानते है पूरा मामला.
kailash vijayvargiya

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय

भारतीय जनता पार्टी के तरह से इंदौर के सुभाष नगर से पाटनीपुरा चौराहे तक लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ पदयात्रा निकाली गई थी. इस यात्रा में शामिल होने मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी पहुंचे. हमेशा अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है जिसने एमपी की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. इंदौर में बीजेपी की अराजकता हटाओ, लोकतंत्र बचाओं रैली के दौरान उन्होंने मंच से एक विवादित बयान दिया.

भाजपा कार्यकर्ताओं को कर रहे थे संबोधित

रैली के बाद भाजपा कार्रकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान एक सामाजिक कार्यकर्ता को देखकर मंत्री विजयवर्गीय अपना आपा खो बैठे. कार्यक्रम स्थल पर इंदौर के सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पांडेय अपने हाथ में एक पोस्टर लेकर पहुंचे। कैलाश विजयवर्गीय जब मंच से लोगों को संबोधित कर रहे थे, तभी प्रहलाद पांडेय उस पोस्टर को दिखा रहे थे. प्रहलाद पांडेय ने अपने पोस्टर में लिख रखा था कि 30000 रुपये में एक बल्ब और 33000 रुपये में एक लीटर फेनाइल है.

मंच से कैलाश विजयवर्गीय सामाजिक कार्यकर्ता के लिए अपशब्दों का प्रयोग करते हैं. कहते हैं कि इतने जूते खाने का बाद फिर से यहां पहुंच गया है. वह फिर मंच से कहते हैं कि ये सब अराजकतावादी लोगों के साथ हैं.

पोस्टर देखकर भड़क गए मंत्री

मंच पर मौजूद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय वह पोस्टर देखकर भड़क गए और अपना आपा खो बैठे. उन्होंनें मंच से कई विवादित बयान दिए. उन्होंने कहा कि कोई पुलिस अधिकारी इधर आ जाओ, एक न्यूसेंस आ गया हैं. उन्होंने कहा की जहां भी जवाब देना होगा हम देंगे तुम यहां से जाओ, नहीं तो यहां के लोग तुम्हें जवाब देंगे.

तभी पीछे से एक कार्यकर्ता आता है प्रहलाद के हाथों से वह पोस्टर छीन लेता है. मंत्री फिर से पुलिस अधिकारी को बुलाते हुए कहते है कि ये न्यूसेंस क्रिएट कर रहा है. इसका कागज लेकर थोड़ी देर के लिए गाड़ी में बैठा दो. थोड़ी ही देर में इंदौर पुलिस अधिकारी प्रहलाद पांडेय को वहां से ले जाने लगते हैं. सामाजिक कार्यकर्ता पुलिसवालों से पूछता कि आखिर उसकी गलती क्या हैं.

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