Mauganj News: मऊगंज में कलेक्टर के आदेश बेअसर, 20 लाख के पंचायत घोटाले में अब तक कार्रवाई नहीं
मऊगंज जिला पंचायत CEO
Mauganj News: मऊगंज जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. जिले के दो चर्चित मामलों में मऊगंज कलेक्टर द्वारा जांच के बाद स्पष्ट कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद जिला पंचायत CEO कार्यालय से न तो ठोस कार्रवाई सामने आई और न ही जिम्मेदारों पर कोई कानूनी शिकंजा कस पाया. ऐसे में अब सवाल उठने लगा है कि आखिर मऊगंज में कलेक्टर के आदेशों की अनदेखी कौन कर रहा है और क्या जिला पंचायत CEO प्रशासनिक आदेशों से भी ऊपर हो गए हैं.
सचिव और सरपंच के खिलाफ जांच कराई
हनुमना जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बरांव से जुड़े मामले में तत्कालीन सचिव रामधनी मिश्रा और तत्कालीन सरपंच श्रीमती अनीता साकेत के खिलाफ शिकायतों की जांच कराई गई थी. जांच प्रतिवेदन में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई. कलेक्टर कार्यालय से जिला पंचायत CEO को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया कि तत्कालीन सचिव रामधनी मिश्रा के विरुद्ध मध्यप्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1993 के तहत अनुशासनात्मक एवं निलंबन की कार्रवाई की जाए. साथ ही तत्कालीन सरपंच अनीता साकेत के खिलाफ भी नियमानुसार पृथक कार्रवाई कर कार्यालय को अवगत कराया जाए.
शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं
लेकिन हैरानी की बात यह है कि महीनों गुजर जाने के बाद भी ना सचिव पर कोई बड़ी कार्रवाई दिखाई दी और ना ही सरपंच के खिलाफ कोई निर्णायक कदम उठाया गया. सवाल यह है कि आखिर कलेक्टर के निर्देशों को किसके संरक्षण में ठंडे बस्ते में डाला गया.
20 लाख के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा
दूसरा मामला हनुमना जनपद की ग्राम पंचायत देवरा का है, जहां मुख्यमंत्री संबल योजना और कर्मकार मंडल की सहायता राशि में लगभग 20 लाख रुपये के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ. आरोप है कि गरीब परिवारों की सामान्य मौत को दुर्घटना बताकर अधिक मुआवजा राशि निकाली गई और सरकारी खजाने में बड़ी हेराफेरी की गई.
जांच के बाद 6 लोगों की भूमिका संदिग्ध
मामले की जांच में पंचायत सचिव, सरपंच, GRS, जनपद शाखा प्रभारी और कंप्यूटर ऑपरेटर समेत कुल 6 लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई. जांच रिपोर्ट के आधार पर मऊगंज कलेक्टर ने जिला पंचायत CEO को पत्र जारी कर दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने, राशि की रिकवरी करने और कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे.
लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी न कोई FIR दर्ज हुई, न रिकवरी हुई और न ही दोषियों पर कोई बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई. इससे पूरे मामले में जिला पंचायत प्रशासन की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है.
जिला पंचायत CEO ने नहीं दिया कोई जवाब
सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब मीडिया ने जिला पंचायत CEO से इन मामलों पर जवाब मांगने की कोशिश की. आरोप है कि CEO कैमरे और सवालों से बचते नजर आए. जवाब देने के बजाय चुप्पी साध लेना अब प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच में दोषी तय हो चुके हैं और कलेक्टर स्तर से कार्रवाई के निर्देश भी जारी हो चुके हैं, तो फिर आखिर कार्रवाई में देरी क्यों? क्या राजनीतिक दबाव काम कर रहा है? या फिर भ्रष्टाचारियों को बचाने का कोई बड़ा खेल पर्दे के पीछे चल रहा है.
ये भी पढ़ें-Mauganj: नीट पेपर लीक पर मऊगंज में उबाल! कांग्रेस ने शहर में निकाला विशाल मशाल जुलूस
प्रशासनिक सिस्टम पर खड़ा हुआ बड़ा सवाल?
मऊगंज में लगातार सामने आ रहे ये दोनों मामले अब केवल पंचायत स्तर की अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहे हैं. यदि कलेक्टर के आदेशों पर भी कार्रवाई नहीं होती, तो आम जनता आखिर न्याय की उम्मीद किससे करे.
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन इन मामलों में कब तक निर्णायक कदम उठाता है. क्योंकि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि भ्रष्टाचार के मामलों में जांच तो होती है, लेकिन दोषियों तक कानून का हाथ कभी पहुंचता ही नहीं क्यों?