ड्रग तस्कर के आरोपी यासीन मछली को SC से मिली जमानत, कोर्ट ने कहा- आरोपों के आधार पर किसी की आजादी नहीं छीन सकते
यासीन मछली(File Photo)
MP News: राजधानी भोपाल का कुख्यात ड्रग तस्कर यासीन मछली को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. विधानसभा में फर्जी प्रवेश पास से जुड़े केस में यासीन मछली को सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है. दरअसल इसी मामले में यासीन ने हाईकोर्ट का रुख किया था. जबलपुर हाईकोर्ट ने आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए इस केस में जमानत याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद यासीन मछली में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई होने के बाद यासीन मछली को जमानत मिल गई.
15 मामलों में पहले ही मिल चुकी थी जमानत
दरअसल ड्रग तस्कर यासीन मछली के खिलाफ कुल 16 आपराधिक मामले दर्ज हैं. NDPS समेत 15 अन्य मामलों में आरोपी यासीन मछली को पहले ही हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सिर्फ पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड जमानत रोकने का आधार नहीं हो सकता. सिर्फ आरोपों के आधार पर किसी की आजादी नहीं छीनी जा सकती. राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि आरोपी के खिलाफ कई केस हैं, आरोपी पर गंभीर प्रकरण दर्ज हैं. इस वजह से जमानत नहीं दिया जाए, लेकिन कोर्ट ने दलील को इनकार करते हुए यासीन मछली को जमानत दे दी है.
गवाहों के मुकरने से मिल गई जमानत
जानकारी के मुताबिक कई गवाह अपने बयान से मुकर गए. जिससे केस कमजोर हुआ और यासीन मछली को आसानी से जमानत मिल गई. सरकार के वकील ने कोर्ट में कहा कि यासीन मछली बाहर आने पर कई गवाहों को प्रभावित कर सकता है. लेकिन कोर्ट ने इस पर कहा कि विशेष कर जब अभियोजन के बाद में ही विरोधाभास हो तो आरोपी की स्वतंत्रता नहीं छीनी जा सकती है. इन सब बात को दरकिनार करते हुए कोर्ट ने आरोपी के अधिकार का हवाला देते हुए जमानत दे दी है.
यासीन के वकील कोर्ट को धन्यवाद दिया
वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में यासीन मछली की ओर से वकील कुणाल रैकवार ने पैरवी की. कोर्ट का फैसला आने के बाद यासीन मछली के वकील ने कोर्ट का आभार जताया. उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति यासीन मछली की जमानत तक सिमित नहीं है, बल्कि हमारे आपराधिक न्याय तंत्र की बुनियादी परीक्षा भी है.
वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि क्या हम आरोपों के आधार पर किसी की स्वतंत्रता छीन सकते हैं. हर मामला अपने तथ्यों और सबूत के आधार पर परखा जाना चाहिए, ना कि पिछले रिकार्ड के आधार पर होना चाहिए. वकील ने कहा, ‘मैंने कोर्ट में जांच की गंभीर खामियां उजागर की. जैसे कि वास्तविक शिकायत के 2 दिन बाद गिरफ्तारी दर्शाना, कथित घटना से पहले दस्तावेज की जपती दिखाना, असंगत गवाही, जांच की प्रक्रिया पूरी तरह विश्वसनीय और निष्पक्ष नहीं रही. हमारा संविधान और न्यायपालिका हर व्यक्ति की अधिकार की सुरक्षा करता है. लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है. हमको कोर्ट पर पूरा भरोसा है कि न्याय मिलेगा.’
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