श्योपुर: जनसुनवाई में ड्रामा करना पड़ा व्यापारी को पड़ा भारी, दंडवत होकर किया था प्रदर्शन, अब हुई FIR

जनसुनवाई में दंडवत करते हुए एक व्यापारी ने अधिकारियों पर लापरवाही के आरोर लगाए थे, लेकिन अब वह व्यापारी की ही फंसता हुए नजर आ रहा है. आइए जानते है क्या है पूरा मामला
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जांच में हुआ बड़ा खुलासा

श्योपुर: बीते मंगलवार को एक खबर सामने आई थी कि जगदीश अग्रवाल नाम का व्यापारी तपती सड़क पर दंडवत करते हुए जनसुनवाई में पहुंचा और उसने कर्मचारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए थे लेकिन अब ये व्यापारी खुद के बनाए जाल में ही फंसता हुए नजर आ रहा है. जगदीश अग्रवाल ने नामांतरण नहीं होने की शिकायत की थी और धमकी भी दी थी कि अगर उसका समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वह आत्मदाह कर लेगा. लेकिन अब ये व्यापारी बुरी तरह फंस चुका है.

जांच में जगदीश अग्रवाल द्वारा अधिकारियों पर लगाए गए सभी आरोप झूठे पाए गए हैं. इसलिए जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी कोतवाली एवं पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर एफआईआर दर्ज कराने के लिए पत्र भी जारी कर दिया है. 2 जून मंगलवार को जब व्यापारी जगदीश अग्रवाल सड़क पर दंडवत करते हुए जनसुनवाई में पहुंचे थे तब उन्होंने जमीन संबंधी मामले में तहसीलदार और पटवारी पर नामांतरण के एवज में एक लाख रुपए मांगने के आरोप लगाए थे. इसके अलावा वर्षों से नामांतरण लंबित होने की शिकायत भी कलेक्टर शीला दाहिमा से की थी.

कलेक्टर शीला दाहिमा के आदेश

इसके बाद कलेक्टर शीला दाहिमा ने निर्देश दिए और व्यापारी की शिकायत की जांच कराई तो चौंकाने वाले खुलासे हुए. डिप्टी कलेक्टर की जांच में पाया गया है कि संबंधित भूमि नामांतरण के लिए व्यापारी जगदीश अग्रवाल ने कभी कोई आवेदन प्रस्तुत ही नहीं किया. न तो तहसीलदार न्यायालय में कोई प्रकरण लंबित है था और न ही विचाराधीन.

पूछताछ में पाया गया है कि….

इसके बाद जब इस मामले में व्यापारी से पूछताछ की गई तो पाया तो व्यापारी ने खुद कबूल किया कि उनसे इस संबंध कभी कोई आवेदन ही नहीं दिया था. इनता ही नहीं उसने पैसे न मांगने की बात भी स्वीकार की और कहा कि मुझसे किसी भी अधिकारी ने पैसे नहीं मांगे. प्रशासन के मुताबिक, व्यापारी ने सोशल मीडिया पर भी बयान देकर जनता को भ्रमित करने तथा प्रशासन की छवि धूमिल करने का प्रयास किया.

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