Dindori News: डिंडौरी की गोंडी कला को मिलेगा वैश्विक मंच, अमेज़न ई-कारीगर से जुड़ेंगे पाटनगढ़ के कलाकार

Dindori News: कलेक्ट्रेट कार्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में गोंडी कलाकारों द्वारा अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई. इस दौरान कलेक्टर अंजू भदौरिया ने कलाकारों की पेंटिंग्स का अवलोकन किया और उनसे उनकी कला, अनुभव तथा भविष्य की संभावनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की.
Dindori Gond Painting

गोंडी कला को मिलेगा वैश्विक मंच

इनपुट-अनिल साहू

Dindori News: मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले की विश्व प्रसिद्ध गोंडी चित्रकला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है. इस पहल के तहत जिले के प्रसिद्ध पाटनगढ़ गांव के गोंडी कलाकारों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर उनकी कला को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है.

ऑनलाइन बिक्री के लिए तैयार होगी कलाकृति

कलेक्ट्रेट कार्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में गोंडी कलाकारों द्वारा अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई गई. इस दौरान कलेक्टर अंजू भदौरिया ने कलाकारों की पेंटिंग्स का अवलोकन किया और उनसे उनकी कला, अनुभव तथा भविष्य की संभावनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की. उन्होंने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए प्रदर्शनी से चित्रों की खरीदारी भी की.

जिला प्रशासन के सहयोग से गोंडी पेंटिंग कलाकारों, आजीविका ग्राम संगठन और डॉट्स एंड ड्रीम्स संस्था के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया है. इस समझौते के माध्यम से कलाकारों को डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिक्री के लिए तैयार किया जाएगा. साथ ही उन्हें अमेज़न ई-कारीगर मंच से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे उनकी कलाकृतियां देश ही नहीं बल्कि विदेशों के ग्राहकों तक भी पहुंच सकेंगी.

गोंडी चित्रकला के लिए महशूर है यह गांव

पाटनगढ़ गांव को गोंडी कला की जन्मस्थली माना जाता है. वर्तमान में गांव के लगभग 157 परिवार प्रत्यक्ष रूप से गोंडी चित्रकला से जुड़े हुए हैं और इसी कला के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं. ऐसे में यह पहल कलाकारों की आय बढ़ाने के साथ-साथ गोंडी कला के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

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डिजिटल होने से आय में होगी बढ़ोतरी

कलेक्टर अंजू भदौरिया ने कहा कि डिंडौरी की गोंडी कला पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान रखती है. यह जिले की सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे पाटनगढ़ के कलाकार पीढ़ियों से सहेजते आ रहे हैं. जिला प्रशासन का प्रयास है कि इन कलाकारों को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनकी कला को उचित सम्मान और आर्थिक लाभ मिल सके. इस पहल से गोंडी कलाकारों में उत्साह का माहौल है. कलाकारों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने के बाद उनकी कला को नई पहचान मिलेगी और उनके लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर सृजित होंगे.

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