झारखंड के इस मंदिर में है भगवान परशुराम का फरसा, जमीन के नीचे धंसा है, रामायणकाल से जुड़ी है कथा

Parshuram Jayanti: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था. ब्राह्मण जाति में जन्म लेने के बाद भी वे पराक्रमी योद्धा माने जाते हैं. वे फरसा नामक शस्त्र धारण करते थे. यही उनकी पहचान बन गई, इसी वजह से उन्हें परशुराम कहा जाता है.
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टांगीनाथ धाम, झारखंड

Parshuram Jayanti: हिंदू मान्यता के अनुसार हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को परशुराम जयंती मनाई जाती है. इस साल रविवार (19 अप्रैल 2026) को हर्षोल्लास के साथ पर्व मनाया जा रहा है. भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का 6वां अवतार माना जाता है. कई हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान परशुराम के नाम का उल्लेख मिलता है.

‘फरसा’ भगवान परशुराम की पहचान

  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान परशुराम का जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था.
  • ब्राह्मण जाति में जन्म लेने के बाद भी वे पराक्रमी योद्धा माने जाते हैं.
  • वे फरसा नामक शस्त्र धारण करते थे. यही उनकी पहचान बन गई, इसी वजह से उन्हें परशुराम कहा जाता है.

झारखंड के इस मंदिर में है ‘फरसा’

  • झारखंड के गुमला जिले में टांगीनाथ धाम है. ये भगवान परशुराम की तपोस्थली के तौर पर जाना जाता है.
  • यहां उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी.
  • धाम में ‘फरसा’ जमीन में धंसा हुआ है. इसकी बनावट शंकर भगवान के त्रिशूल की तरह है.
  • इस मंदिर में श्रद्धालु फरसे की पूजा भगवान शिव के त्रिशूल के रूप में करते हैं.

क्या कहती है कथा?

  • भगवान परशुराम की कथा रामायण काल से जुड़ी हुई है.
  • त्रेतायुग में राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता का स्वयंवर आयोजित किया.
  • देवी सीता से विवाह के लिए उनके पिता ने शर्त रखी कि वर को शिवजी का पिनाक धनुष उठाना होगा.

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  • भगवान राम ने पिनाक धनुष उठाया तो वह भंग हो गया.
  • जब ये बात भगवान परशुराम को पता चली तो वे बहुत क्रोधित हुए और स्वयंवर स्थल पहुंचे.
  • इस दौरान उनकी लक्ष्मण से तीखी नोक-झोंक हुई.
  • जब उन्हें मालूम चला कि भगवान राम कोई सामान्य व्यक्ति नहीं बल्कि भगवान विष्णु के अवतार हैं तो उन्होंने क्षमा मांगी और वापस चले गए.

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