जबलपुर में स्लीपर कोच में नहीं मिलेगा बेडरोल, एजेंसियां प्रोजेक्ट लेने को तैयार नहीं; अधर में लटकी योजना!

एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता भारतीय रेल में स्लीपर कोच की स्थिति को लेकर है. एसी कोच की तुलना में स्लीपर कोच की खिड़कियां खुली रहती हैं. ऐसे में बेडरोल, तकिया और अन्य चीजों के मेंटेनेंस को लेकर काफी परेशानी हो सकती है.
File Photo.

File Photo.

Sleeper Coach Bedroll Project Stalled: भारतीय रेलवे की स्लीपर कोच में बेडरोल देने की योजना अधर में लटकती नजर आ रही है. इसका बड़ा कारण एजेंसियों का प्रोजेक्ट में दिलचस्पी ना दिखाना है. दक्षिण रेलवे में सफल होने के बाद देशभर में इस योजना को लागू किया जाना था. मध्य पश्चिम रेलवे से यानी जबलपुर से इसकी शुरुआत होनी थी. जिससे कि स्लीपर कोच में भी रेल यात्रियों को आरामदायक सफर मिल सके. लेकिन योजना के संचालन के लिए प्राइवेट एजेंसियां आगे नहीं आ रही हैं.

स्लीपर कोच में मेंटेनेंस करना मुश्किल

दक्षिण रेलवे में ट्रेनों के स्लीपर कोच में बेड रोल की सुविधा शुरू की गई थी. दक्षिण भारत की ट्रेनों में ये प्रोजेक्ट काफी सफल भी रहा. जिसके बाद देशभर में इस मॉडल को लागू करने की योजना बनाई गई थी. जबलपुर में स्लीपर कोच में बेडरोल देने के लिए प्रोजेक्ट के तहत आवेदन आमंत्रित किए गए थे. लेकिन प्राइवेट एजेंसियों ने इसके लिए आवेदन नहीं दिए.

एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता भारतीय रेल में स्लीपर कोच की स्थिति को लेकर है. एसी कोच की तुलना में स्लीपर कोच की खिड़कियां खुली रहती हैं. ऐसे में बेडरोल, तकिया और अन्य चीजों के मेंटेनेंस को लेकर काफी परेशानी हो सकती है. इसके अलावा स्लीपर कोच में गंदगी भी ज्यादा होती है. ऐसे में एजेंसियों को चादरों की सफाई करने का खर्च भी ज्यादा देना पड़ता.

अतिरिक्त शुल्क के साथ सुविधा देने की थी तैयारी

एसी कोच में सामान्य तौर पर सभी ट्रेनों में बेडरोल दिया जाता है. इसके लिए कोई भी एक्ट्रा चार्ज नहीं लिया जाता है. लेकिन रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना में स्लीपर कोच में बेडरोल देने के लिए अतिरिक्त शुल्क था. हालांकि ये पूरी तरह से यात्रियों की इच्छा पर निर्भर था कि वे बेडरोल लेना चाहते हैं या नहीं. जो बेडरोल नहीं लेते उन्हें कोई भी अतिरिक्त चार्ज नहीं देना था. रिजर्वेशन करते समय ही यात्रियों को स्लीपर कोच में बेडरोल का विकल्प चुनना था.

बता दें जबलपुर से दिल्ली, पुणे, मुंबई और पटना लंबी दूरी की ट्रेनों के स्लीपर कोच में बेडरोल की सुविधा देने की तैयारी थी. फिलहाल तो एजेंसियों के प्रोजेक्ट के लिए इंट्रेस्ट ना दिखाने से ये ठंडे बस्ते में जाता हुआ दिखाई दे रहा है.

ये भी पढे़ं: MP Rajya Sabha Election: बीजेपी प्रत्याशी महेश केवट ने नामांकन भरा; CM बोले- केवट समाज के प्रतिनिधित्व की कमी थी

ज़रूर पढ़ें