‘जीवन में खुद चुने राम या रावण का रास्‍ता…’, राघौगढ़ में श्रीराम महायज्ञ में बोले अभि‍नेता आशुतोष राणा

MP News: शाम को अभिनेता आशुतोष राणा, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और विधायक जयवर्धन सिंह यज्ञशाला पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर यज्ञ में आहुतियां दीं और भगवान राम की आरती में शामिल हुए.
Ashutosh Rana

अभिनेता आशुतोष राणा

MP News: गुना जिले के राघौगढ़ क्षेत्र के भैंसाना गांव में सोमवार से 11 दिवसीय श्रीराम महायज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ. आयोजन के पहले दिन तूमन खेड़ी से भैंसाना तक निकली विशाल कलश यात्रा में 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया. शाम को अभिनेता आशुतोष राणा, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और विधायक जयवर्धन सिंह यज्ञशाला पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर यज्ञ में आहुतियां दीं और भगवान राम की आरती में शामिल हुए.

पार्वती नदी घाट से निकली कलश यात्रा

सुबह तूमन खेड़ी स्थित पार्वती नदी घाट से कलश यात्रा की शुरुआत हुई. श्रद्धालुओं ने नदी से जल भरकर कलश अपने सिर पर धारण किए और भक्ति भाव के साथ पदयात्रा करते हुए भैंसाना गांव पहुंचे. यात्रा में महिलाएं कलश लेकर चल रही थीं, जबकि कई श्रद्धालु भागवत जी को सिर पर रखकर आगे बढ़े. आयोजन स्थल पहुंचने के बाद भक्तों ने यज्ञशाला की परिक्रमा भी की.

आशुतोष राणा ने बताए भगवान राम के आदर्श

कार्यक्रम के दौरान अभिनेता आशुतोष राणा ने भगवान राम के आदर्शों और मानव जीवन के मूल्यों पर विस्तार से विचार रखे. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के भीतर दशरथ और दशानन दोनों मौजूद हैं, लेकिन यह इंसान पर निर्भर करता है कि वह किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है. उन्होंने कहा कि पांच ज्ञानेंद्रियों और पांच कर्मेंद्रियों से बना शरीर ही दशरथ का स्वरूप है और मनुष्य को अपने जीवन में मर्यादा, संयम और सदाचार का मार्ग चुनना चाहिए.

राम के चरित्र से जीवन को बेहतर बनाने की सीख

आशुतोष राणा ने आगे कहा कि भगवान राम निराकार से साकार रूप में इसलिए आए ताकि वे मनुष्य को ऊंचे जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित कर सकें. उन्होंने कहा कि व्यक्ति चाहे तो राम के चरित्र, विचार और आदर्शों से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकता है.

शिव और राम नाम की महिमा का किया उल्लेख

भगवान शिव का उल्लेख करते हुए राणा ने कहा कि महादेव त्याग, समर्पण और करुणा के प्रतीक हैं. उन्होंने कहा कि शिव ने संसार को सब कुछ दे दिया, लेकिन अपने पास केवल ‘राम’ नाम रखा. इसी राम नाम की शक्ति ने उन्हें विष को धारण करने की क्षमता दी और वे नीलकंठ कहलाए. उन्होंने जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि अमृत तक पहुंचने से पहले विष का सामना करना पड़ता है और जो कठिनाइयों को स्वीकार कर आगे बढ़ता है, वही सफलता और सुख प्राप्त करता है.

दिग्विजय सिंह ने किया स्वागत

इस मौके पर दिग्विजय सिंह ने मंच से आशुतोष राणा का स्वागत करते हुए उन्हें संस्कृति और संस्कारों से जुड़ी हस्ती बताया. उन्होंने कहा कि राणा इन दिनों ‘हमारे राम’ नामक नाटक में रावण की भूमिका निभा रहे हैं. दिग्विजय सिंह ने हाल ही में ग्वालियर में इस नाटक को देखने का जिक्र करते हुए इसे बेहद प्रभावशाली और अद्भुत प्रस्तुति बताया.

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