‘बच्चों को भूसे की तरह ठूंस रहे स्कूल वाहन’, ओवरलोडिंग पर ग्वालियर हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी

MP News: ग्वालियर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने स्कूली वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने और परिवहन नियमों के उल्लंघन के मामले में प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है.
MP Gwalior High Court (File Photo)

MP ग्वालियर हाई कोर्ट(File Photo)

MP News: ग्वालियर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने स्कूली वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने और परिवहन नियमों के उल्लंघन के मामले में प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है. अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल कागजों पर कार्रवाई दिखाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसका असर सड़कों पर भी नजर आना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि स्कूली वाहनों में बच्चों को भूसे की तरह भरा जा रहा है. ऐसे में प्रशासन को वास्तविक कार्रवाई कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी.

2019 के बाद स्टेटस रिपोर्ट नहीं होने पर कोर्ट नाराज

अवधेश सिंह भदौरिया की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान आरटीओ और पुलिस प्रशासन ने अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की. रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद अदालत ने नियमित निगरानी और कार्रवाई की निरंतरता पर सवाल उठाए. हाई कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2017 में दिए गए आदेश के अनुसार नियमित स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जानी थी, लेकिन वर्ष 2019 के बाद से कोई रिपोर्ट पेश नहीं की गई.

अदालत ने चेताया कि प्रशासन को अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए बार-बार याद दिलाना न्यायालय का काम नहीं है. यदि संबंधित अधिकारी आदेशों के पालन को लेकर निरंतरता का शपथ-पत्र प्रस्तुत नहीं करते हैं, तो यह अवमानना का विषय बन सकता है.

स्‍कूल बच्‍चों को लेकर जाने वाली ऑटो के लिए भी निर्देश

स्कूली बच्चों को ले जाने वाले ऑटो की फिटनेस जांच को लेकर भी निर्देश जारी किए गए हैं. प्रशासन ने चारों ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों को हिदायत दी है कि अतिरिक्त सीट या बैठने के लिए फट्टी लगाकर चलाए जा रहे ऑटो को फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी न किया जाए. नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की जा रही है.

प्रभारी एसपी ने मांगा समय, जमीनी सुधार का दिया भरोसा

सुनवाई के दौरान ग्वालियर के प्रभारी पुलिस अधीक्षक ने अदालत को बताया कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है. उन्होंने अगली सुनवाई तक का समय मांगा और भरोसा दिलाया कि स्कूली वाहनों की व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जाएगी. साथ ही, अगली सुनवाई तक जमीनी स्तर पर सुधार दिखाने का प्रयास किया जाएगा.

संभाग के नौ अन्य जिलों में भी हालात चिंताजनक

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि स्कूली वाहनों में नियमों की अनदेखी का मामला केवल ग्वालियर शहर तक सीमित नहीं है. ग्वालियर संभाग के अन्य नौ जिलों में भी हालात चिंताजनक हैं और निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं दिखाई दे रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने संबंधित पक्षों को अपने सुझाव लिखित रूप में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. अब अगली सुनवाई में प्रशासन की कार्रवाई और बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर नजर रहेगी.

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