Masik Shivratri 2026: अप्रैल में कब है मासिक शिवरात्रि? जानिए भगवान शिव को प्रसन्न करने का तरीका और पूजा विधि
मासिक शिवरात्रि 2026
Masik Shivratri 2026: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि यानी हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन शिव पूजा की जाती है. इस दिन को शिवरात्रि के समान पुण्य फलदायी माना जाता है. इस साल वैशाख मासिक शिवरात्रि 15 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी. पुराणों के अनुसार इस दिन रात के समय श्रद्धा से की गई पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं. भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्तों को सुख, शांति और दीर्घायु तथा मोक्ष का आर्शीवाद प्रदान करते हैं.
वैशाख मासिक शिवरात्रि शुभ मुहूर्त
वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली शिवरात्रि इस साल 15 अप्रैल 2026 को रात 10:31 बजे शुरू होगी और अगले दिन यानी 16 अप्रैल 2026 को रात 8:11 बजे इसका समापन हो जाएगा. इस दौरान पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त रात 11:55 बजे से देर रात 12:40 यानी 16 अप्रैल तक रहेगा.
मासिक शिवरात्रि पर रात्रि में क्यों कि जाती है पूजा?
शिव पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार ‘रात्रि’ का समय आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेहद ही शाक्तिशाली और प्रभावी माना जाता है, क्योंकि रात्रि का ये वाला काल वह काल होता है, जब वातावरण शांत, मन एकाग्र और साधना के लिए सबसे अनुकूल होता है. माना जाता है कि इसी रात्रि में भगवान शिव का प्रकट्य (लिंग रूप में) हुआ था. यही कारण है कि इस समय उनकी उपासना करने से विशेष फल मिलता है.
चार प्रमुख प्रहर में करें पूजा
- पहले प्रहर में की गई पूजा शारीरिक शुद्धि के लिए मानी जाती है, जिससे व्यक्ति अपने कर्मों से जुड़े पापों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करता है.
- दूसरे प्रहर में की गई पूजा मानसिक शुद्धि के लिए होती है, जिससे नकारात्मक विचार और तनाव दूर होते हैं.
- तीसरा प्रहर में की गई साधना को आध्यात्मिक जागरण का समय माना गया है. मान्यता है कि जब मन ध्यान और भक्ति में गहराई के साथ जुड़ता है.
- चौथे और अंतिम प्रहर में पूजा करने से पूर्ण फल और मोक्ष की प्राप्ति वाले मार्ग प्रशस्त हो जाता है, क्योंकि यह समय सबसे अधिक दिव्य और शाक्तिशाली माना गया है.
- रात्रि के समय इन चारों प्रहरों में अलग-अलग प्रकार से भगवान शिव के अभिषेक किए जाते हैं और महादेव को प्रसन्न किया जाता है.
मासिक शिवरात्रि पूजा विधि
- मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें. पूजा से पहले व्रत और अभिषेक का संकल्प लें.
- शिवलिंग की साफ जल से शुद्धि करें और पूजा स्थान को पवित्र रखें. इस दिन यदि मंदिर नहीं जा सकते तो घर में भी शिवलिंग स्थापित कर सकते हैं.
- शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें.
- इसके बाद शिवलिंग को फिर दोबारा गंगाजल से स्नान कराएं. अभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें.
- शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित कर दें (ध्यान रखें कि उल्टा न रखें).
- शिवंलिंग पर चंदन, अक्षत, फूल और भस्म अर्पित करें. धूप-दीप जलाकर आरती करें.
- मासिक शिवरात्रि पर रात के चार प्रहरों में अभिषेक और पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है.
ये काम ना करें
- शिवलिंग पर तुलसी, दाल न चढ़ाएं.
- केतकी का फूल शिव जी को आर्पित न करें.
- बेलपत्र साफ और सही दिशा में ही चढ़ाएं.
- तन और मन से सात्विक रहें.
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(डिस्क्लेमर: यह खबर धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिष शास्त्र और पंचांग आधारित जानकारी पर लिखी गई है. इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है. विस्तार न्यूज किसी भी ज्योतिषीय दावे की पुष्टि नहीं करता है.)