MP News: पराली जलाने में देश का नंबर वन राज्य बना एमपी, 5 साल में दर्ज हुए 77 हजार मामले, विदिशा-उज्जैन टॉप पर
पराली जलाने में एमपी नंबर वन
MP News: मध्य प्रदेश में गेहूं की पराली जलाने वाले मामलों में लगातार तेजी हो रही है. कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड माॅडलिंग फ्रॉम स्पेस (CREAMS) और ICAR के मौजूदा डेटा के अनुसार, पूरे देश में पराली जलाने के मामलों में एमपी पहले स्थान पर पहुंच चुका है.
देश के 5 राज्यों के 28,167 मामलों में से करीब 69 प्रतिशत की हिस्सेदारी केवल एमपी ही कर रहा है. 1 अप्रैल से लेकर 21 अप्रैल के बीच प्रदेश में कुल 20 हजार 164 घटनाएं दर्ज की गई है, जो देश में सबसे ज्यादा है.
प्रदेश में विदिशा-उज्जैन टॉप पर
वहीं जिला स्तर पर देखा जाए तो विदिशा और उज्जैन गेहूं की पराली जलाने वाले मामले में सबसे आगे है. हालांकि इस बार का आंकड़ा पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम है. वर्ष 2025 में कुल 20,422 मामले सामने आए थे. इस पर विशेषज्ञों का कहना था कि इस साल फसल अवशेष जलाने के सारे रिकॉर्ड टूट सकते हैं.
प्रदेश के इन जिलों में सबसे ज्यादा मामले
जानकारी के अनुसार, विदिशा पराली जलाने के मामले में सबसे आगे है. जिले में 1 अप्रैल से लेकर 21 अप्रैल के बीच करीब 2086 पराली जलाने की घटनाएं सामने आई हैं. इसके साथ ही उज्जैन में 2053, रायसेन में 1982 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. वहीं होशंगाबाद में 1705 और शिवनी में 1369 मामले सामने आए हैं.
देशभर में पहले नंबर पर एमपी
पराली जलाने के मामलों में एमपी देश का नंबर वन राज्य बन गया है. वहीं इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश है, जहां 1 अप्रैल से लेकर 21 अप्रैल तक 8,889 मामले सामने आए हैं. हालांकि ये आंकड़ा मध्य प्रदेश की तुलना में काफी कम है. इसके साथ ही हरियाणा का स्थान आता है, जो पूरे देश में तीसरे नंबर पर है. हरियाणा में इस दौरान 65 मामले सामने आए हैं, जो एमपी और यूपी की तुलना में बेहद कम है. वहीं पंजाब की बात करे तो यहां कुल 44 घटनाएं सामने आई है.
पराली जलाना पूरी तरह से प्रतिबंधित
आपको बता दें कि सिर्फ एमपी ही नहीं पूरे देश में पराली (फसल अवशेष) जलाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. ऐसा करने पर सथानीय प्रशासन कार्रवाई कर सकता है. पराली जलाने वाले किसानों को भारी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है. इसके लिए सरकार ने 2,500 से 15,000 रुपये तय किए गए हैं. नियम का बार-बार उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है और सजा का भी प्रावधान है.
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