भारतीय रेलवे का बड़ा फैसला! ट्रेन में अब बॉडी कैमरा पहनकर टिकट चेक करेंगे TTE, जानिए सिस्टम कैसे करेगा काम
बॉडी कैमरा पहनकर टिकट चेक करेंगे TTE
Indian Railway Ticket Checking System: भारतीय रेलवे अब टिकट चेकिंग सिस्टम को पहले से ज्यादा आधुनिक बनाने जा रहा है. आने वाले समय में ट्रेन में टिकट जांच करने वाले TTE (ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर) बॉडी कैमरा पहनकर ड्यूटी करेंगे. रेलवे का मानना है कि इससे यात्रियों और TTE दोनों की सुरक्षा बेहतर होगी. साथ ही टिकट चेकिंग के दौरान होने वाले विवाद और गलत शिकायतों को भी कम किया जा सकेगा. कैमरे की मदद से पूरी जांच प्रक्रिया रिकॉर्ड होगी, जिससे किसी भी घटना का वीडियो सबूत मौजूद रहेगा.
बॉडी कैमरा कैसे काम करेगा?
- रेलवे द्वारा दिए जाने वाले ये बॉडी कैमरे छोटे लेकिन आधुनिक तकनीक से लैस होंगे.
- इनमें HD वीडियो रिकॉर्डिंग, ऑडियो रिकॉर्डिंग और रात में रिकॉर्डिंग करने के लिए नाइट विजन जैसी सुविधाएं होंगी.
- कैमरे की बैटरी लगभग 20 घंटे तक चलेगी, जिससे लंबी दूरी की ट्रेनों में भी लगातार रिकॉर्डिंग हो सकेगी.
- इसके अलावा कैमरे को इस तरह बनाया गया है कि रिकॉर्डिंग के साथ आसानी से छेड़छाड़ नहीं की जा सके.
किन जगहों पर शुरू हुई नई व्यवस्था?
- फिलहाल रेलवे ने इस सिस्टम को ट्रायल के तौर पर कुछ रेलवे मंडलों में शुरू किया है.
- इसमें मुंबई, वॉल्टेयर और रायपुर मंडल शामिल हैं.
- यहां TTE को बॉडी कैमरा इस्तेमाल करने की विशेष ट्रेनिंग भी दी जा रही है.
- रेलवे अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती नतीजे अच्छे मिले तो भविष्य में इस व्यवस्था को पूरे देश में लागू किया जा सकता है.
यात्रियों और TTE को क्या फायदा होगा?
- रेलवे के अनुसार, टिकट जांच के दौरान कई बार यात्रियों और TTE के बीच बहस या विवाद हो जाते हैं.
- कुछ मामलों में गलत शिकायतें भी सामने आती हैं.
- अब बॉडी कैमरे की रिकॉर्डिंग ऐसे मामलों में सबूत का काम करेगी.
- इससे TTE पर झूठे आरोप लगने की संभावना कम होगी और यात्रियों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच भी आसान हो जाएगी.
- रेलवे का कहना है कि इससे ट्रेन में पारदर्शिता और अनुशासन दोनों बढ़ेंगे.
रेलवे में बढ़ रहा नई तकनीक का इस्तेमाल
भारतीय रेलवे पिछले कुछ सालों से लगातार नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दे रहा है. ऑनलाइन टिकट बुकिंग, AI आधारित निगरानी सिस्टम और स्मार्ट रेलवे स्टेशन जैसी सुविधाओं के बाद अब बॉडी कैमरा सिस्टम को भी रेलवे के बड़े तकनीकी कदम के रूप में देखा जा रहा है.