किस खतरनाक बीमारी से जूझ रहे थे Virat Kohli? फिर राहुल द्रविड़-विक्रम राठौर कैसे बने सहारा
विराट कोहली
Virat Kohli: भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने अपनी मानसिक स्थिति को लेकर ऐसा खुलासा किया है, जिसने फैंस को हैरान कर दिया है. हाल ही में विराट कोहली ने खुलासा किया है कि अपने करियर के सबसे सफल दौर में भी वह लंबे समय तक इम्पोस्टर सिंड्रोम जैसी मानसिक समस्या से जूझते रहे. इस दौरान वह खुद की क्षमता पर शक करते रहे. उन्हें लगता था कि वह इतने अच्छे खिलाड़ी नहीं हैं, जितना लोग उन्हें समझते हैं.
Virat Kohli ने किया बड़ा खुलासा
दरअसल हाल ही में बेंगलुरू में आयोजित आरसीबी इनोवेशन लैब इंडियन स्पोर्ट्स समिट पावर्ड बाय लीडर्स में किंग कोहली ने बात करते हुए बताया कि कप्तानी और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने के दबाव धीरे-धीरे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने लगा था. मैदान पर आक्रामक और आत्मविश्वश से भरे विराट अंदर से टूट रहे थे. कप्तानी का लगातार दबाव उन्हें मानसिक रूप से थका चुका था. इसके अलावा उन्होंने माना कि तीनों फॉर्मैट की जिम्मेदारी निभाते-निभाते वह पूरी तरह से ‘मेंटली ड्रेन’ हो चुके थे. कई बार वह खुद पर शक करने लगे थे.
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राहुल द्रविड़ और विक्रम राठौर कैसे बने सहारा?
इस मुश्किल दौर में टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच राहुल द्रविड़ और बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौर विराट कोहली का सबसे बड़ा सहारा बने. विराट ने खुलासा करते हुए बताया कि इन दोनों ने न सिर्फ एक खिलाड़ी के तौर पर, बल्कि एक इंसान के रूप में भी उनका ध्यान रखा. कोहली ने बताया कि कप्तानी छोड़ने के बाद वे खुद को फिर से संभालने और समझाने की कोशिश कर रहे थे. उस दौरान द्रविड़ और राठौर ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका दिया. विराट का मानना है कि इन दोनों ने ही उन्हें दबाव से निकालने का मौका दिया. द्रविड़ और राठौर के सहयोग से ही वह दोबारा क्रिकेट का आनंद महसूस कर सके.
Virat Kohli 🤝 Rahul Dravid pic.twitter.com/6tP3FuoTXo
— Cricbuzz (@cricbuzz) May 19, 2026
क्या है इम्पोस्टर सिंड्रोम?
इम्पोस्टर सिंड्रोम एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति अपनी योग्यताओं और सफलताओं पर संदेह करता रहता है. लाख कोशिशों और उपलब्धियों के बावजूद, व्यक्ति को हमेशा यह डर
बना रहता है कि वह किसी धोखेबाज (इम्पोस्टर) की तरह व्यवहार कर रहा है और एक दिन सब उसकी सच्चाई जान जाएंगे. भले ही उसके पास अपनी सफलता के पुख्ता सबूत हों.